मेरी आवाज सुनो

मेरी आवाज़ ही पहचान है॥

88 Posts

765 comments

razia mirza listenme


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

सलाम एक ग़रीब की महानता को

Posted On: 26 Mar, 2010  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (11 votes, average: 3.91 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

27 Comments

..और फ़िज़ा..खो गई!!!

Posted On: 7 Aug, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others लोकल टिकेट में

4 Comments

मेरे बाबा!!फाधर्स डे पर मेरे आँसुंओं का तोहफ़ा!!!

Posted On: 20 Jun, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

19 Comments

….कभी तो आया करो!!!!

Posted On: 15 May, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

मस्ती मालगाड़ी मेट्रो लाइफ लोकल टिकेट में

5 Comments

…इस शहर का हर रास्ता सूमसाम-सा क्यूं है????

Posted On: 2 Apr, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

3 Comments

!!!!क्या जागरण सुन रहा है या सो……?

Posted On: 17 Mar, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others लोकल टिकेट में

8 Comments

ये J J कौन है?

Posted On: 16 Feb, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

22 Comments

“हमारी अधुरी कहानी”Valentine Contest

Posted On: 12 Feb, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 2.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others मेट्रो लाइफ लोकल टिकेट में

9 Comments

…… बंदीनी

Posted On: 12 Feb, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others मस्ती मालगाड़ी मेट्रो लाइफ लोकल टिकेट में

4 Comments

….थोड़ी सी बेवफाई!!!!!

Posted On: 29 Nov, 2010  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others लोकल टिकेट में

9 Comments

……..लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक……..

Posted On: 19 Nov, 2010  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others लोकल टिकेट में

11 Comments

Page 1 of 3123»

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: razia mirza listenme razia mirza listenme

के द्वारा: razia mirza listenme razia mirza listenme

के द्वारा: razia mirza listenme razia mirza listenme

के द्वारा: razia mirza listenme razia mirza listenme

के द्वारा: razia mirza listenme razia mirza listenme

के द्वारा: razia mirza listenme razia mirza listenme

के द्वारा: razia mirza listenme razia mirza listenme

के द्वारा: razia mirza listenme razia mirza listenme

के द्वारा:

के द्वारा: razia mirza listenme razia mirza listenme

आदरणीय रज़िया जी, जागरण जंक्शन सभी पाठकों के साथ समान व्यवहार की नीति अपनाता है और सामान्य रूप से अपने सभी पाठकों से ये अपेक्षा करता है कि वे मंच की गरिमा के विरुद्ध कोई भी अनर्गल प्रलाप नहीं करेंगे. विगत में भी ये देखने में आया है कि कुछ अराजक तत्व मंच द्वारा दी गई सहूलियतों का नाजायज फायदा उठा कर आपसी वैमनस्य और घृणा को जन्म देने की कोशिश कर रहे हैं जबकि इस मंच का इस्तेमाल केवल और केवल प्रेम बढ़ाने के लिए होनी चाहिए. रही बात किसी यूजर के ब्लॉग पर आए अशोभनीय, असंसदीय या अश्लील कमेंट को हटाने की तो मंच अपने गंभीर पाठकों से ये उम्मीद रखता है कि वे किसी भी प्रकार का कूड़ा-करकट स्वयं हटा दें और ऐसा होता भी आया है. और यदि कोई पाठक ऐसा नहीं करता तो फिर विवशतावश मंच ये कठोर कदम खुद उठाता है. ध्यान रहे जागरण जंक्शन मंच ब्लॉगिंग के मूल सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है इसलिए इसमें यूजर को अपनी अभिव्यक्ति की अधिकाधिक आजादी प्रदान की जाती है. लेकिन इस आजादी का दुरुपयोग करने वालों को बहिष्कृत करने के अतिरिक्त कोई अन्य रास्ता भी नहीं. धन्यवाद जागरण जंक्शन टीम

के द्वारा: JJ Blog JJ Blog

के द्वारा: razia mirza listenme razia mirza listenme

आदरणीय रजिया जी ....सादर अभिवादन ! आपने मुझको अपनी नवीनतम पोस्ट देखने की सलाह दी थी ..... लेकिन कल जब मैं यहाँ पर आया था तो सबसे उपर एक पोस्ट नजर आ रही थी लेकिन वोह पिछले साल में प्रकाशित हुई थी जिसमे की आपने कैंसरग्रस्त मरीज के ठीक हो जाने पर उसकी मदद करनी चाही थी ..... लेकिन उसने मदद लेने की बजाय अपनी तरफ से कुछ करने की ठानी थी ...... उस लेख के शीर्षक में गरीब की महानता का जिक्र था ..... (लेकिन आज सबसे उपर कोई दूसरी ही पोस्ट नजर आ रही है , यह बात मेरी भी समझ से बाहर है ) मेरी प्रतिकिर्या आपकी उस गरीब की महानता वाली पोस्ट + आपके द्वारा मेरे ब्लाग पर अपनी टिप्पणी में घर में कोहराम के जिक्र को आधार बना कर लिखी गई थी ..... अगर कुछ गलत कहा गया हो तो माफ़ी मांगता हूँ

के द्वारा: rajkamal rajkamal

के द्वारा:

के द्वारा:

आदरणीय रज़िया जी ...सादर अभिवादन ! आपकी पिछली पोस्ट वाला कमेन्ट भी यहीं पर कर रहां हूँ ,क्षमा कीजियेगा .... अगर मेरी शादी हुई तो मैं अपनी होने वाली पत्नी को अपनी तनख्वाह छह हजार की बजाय ५४०० बताना पसन्द करूँगा ..... हम किसी को किराए पर अगर अपना कोई भूभाग देते है तो उससे किराया हर महीने वसूलते है .... अब जब हम उस कुदरत की धरती + वायु + पानी + खाध्य पदार्थ इस्तेमाल करते है तो क्या यह हमारा फर्ज नही बनता है की हम अपनी कमाई का दसवां नहीं तो कुछ ना कुछ दान अवश्य करे ...... अगर आपने किसी जरूरतमंद की कोई मदद करनी चाही तो यह आपकी आत्मिक खुशी और संतुष्टि के लिए आपको जरूरी लगा होगा , तभी आपने किसी के लिए कुछ करने की सोची ..... बाकी आपके घर के लोगों के विचारों के बारे में जानकर ही कुछ कहा जा सकता है ..... और रही बात स्वाभिमान और ज़ज्बे की तो यह किसी में भी हो सकता है..... धन्यवाद उनकी महानता के हमको दर्शन करवाने के लिए .....

के द्वारा: rajkamal rajkamal

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा: abodhbaalak abodhbaalak

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

रजिया जी, थोड़े अंतराल के बाद पुन: आपकी बेहतरीन कविता पढ़ने को मिली। मां को सम‍िर्पित आपकी यह कविता एक हकीकत है और आपकी इस रचना पर सीमा जी द्वारा दिए कमेंट से मैं भी पूरी तरह इत्‍तफाक रखते हुए कहना चाहता हूं कि मां भगवान से भी बढ़कर उसका दूसरा रूप है। दुख होता है ऐसी घटना या ऐसी बातों से जो आसपास में घटित होता है, मां-बाप के प्रति बेटे-बेटियों के रवैये से। खासकर एक खास उम्र के बाद मां-बाप के प्रति बेटे-बेटियों की जो जिम्‍मेदारी है उससे दूर भागने या यू कहें उसके प्रति गैरजिम्‍मेदाराना व्‍यवहार से। आपकी इस कविता ने तो मुझ्‍ो भावनात्‍मक कर दिया। ईश्‍वर करे आपकी कविता में व्‍यक्‍त भाव जन-जन का भाव बने।

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

लेकिन रज़िया जी,आप याद करें इतनी महगाई आपने पहले कभी देखी है,आज तो माध्यम वर्ग भी bpl के आस-पास आ चुका है,सरकार को सांसदों और मंत्रियों के वेतन-भत्ते कम दिखते हैं जिससे कि वो उनकी मांग करते ही तुरंत बढ़ा देती है,जबकि 'they are good for nothing',और आम आदमी की उसको परवाह ही नहीं है,आखिर सरकार अपना खर्च कम करके भी तो एक उदहारण पेश कर सकती है,आज सरकार और नेताओं के प्रति आम आदमी के मन मैं विश्वास नहीं है,माँ बताती हैं कि लाल बहादुर शास्त्री के कहने पर लोग ख़ुशी ख़ुशी एक वक़्त का व्रत रखते थे,लेकिन आज सरकार ने अधिकतर लोगों,गरीबों कि तो बात छोड़ ही दीजिये,इसके लिए मजबूर कर दिया है,क्या लोगों की आय, महंगाई के अनुपात में बढ़ी है?इस बहरी सरकार और निकम्मे नेताओं को आम आदमी कैसे समझाए?बंद किसी भी मसले का इलाज नहीं है,लेकिन आप ही सुझाएँ क्या तरीका हो सकता है जनविरोधी सरकार तक बात पहुँचाने का? नेताओं की ऐश तो करदाता के पैसों से ही हो रही है ना,

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा: razia mirza razia mirza

के द्वारा: razia mirza razia mirza

के द्वारा: razia mirza razia mirza

के द्वारा:

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: RASHID - Proud to be an INDIAN RASHID - Proud to be an INDIAN

के द्वारा:

रजिया जी,आपकी भावनाओं में सामाजिक सरोकार मिलता है इसलिए आपके ब्लॉग का मुझे बेसब्री से इंतज़ार रहता है,हम जैसा व्यव्हार अपने घर के और बाहर के बुजुर्गों से करते हैं वो एक संस्कार के रूप में हम अपने बच्चों को देते हैं,पिछली पीढ़ी के साथ हमारी पीढ़ी का जो व्यव्हार रहेगा यकीन मानिए वोही हमें अगली पीढ़ी से मिलना है,ये नई पीढ़ी कमोवेश पैसों और भौतिकता को भावनाओं से ज्यादा तवज्जो देने वाली है तो उन्हें भी यही चीजें return गिफ्ट मिलेंगी,अभी सच में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की जरूरत है चूँकि ये हमारी भारतीय संस्कृति की चीजें न होकर पश्चिमी सभ्यता की हैं,इसलिए सांस्कृतिक पुनर्जागरण चाहिए जिससे हम अपने संस्कारों को अपने कर्मों से प्रसारित कर सकें,लेकिन आज इन \'फालतू चीजों\' के लिए फुरसत किसे है,लोग अपने बूढ़े माँ-बाप को घर से निकल देते हैं,और घर में भी उनसे सम्मान से व्यव्हार नहीं करते,वास्तव में ये बुराइयाँ \'नए पैसेवालों\'जिन्हें neo -elite भी कह सकते हैं में ज्यादा दिखती हैं,वो एक कहावत है न\'अध जल गगरी छलकत जाय\'

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा: razia mirza razia mirza

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा: kaushalvijai kaushalvijai

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

आप तो अपनी भडाश निकालने लगे, दुसरो की कमियां निकालने से आपकी अपनी कमियां दूर नहीं हो जाती है, लेकिन सवाल मानसिकता का है अगर कोई सुधार लाना ही नहीं चाहता और उसके एवज में पचास बहाने बनाये या दुसरो की कमियां निकाले तो आपका अल्लाह भी उसकी कोई मदद नहीं कर सकता,इस दुनिया में कोई भी ऐसा धर्म नहीं जिसमे मानवता के कल्याण की बाते न हो और कुछ ऐसी बाते न हो जिसे आज उचित नहीं ठहराया जा सकता,फैसला आपको लेना होता है खुले दिमाग से लेकिन अगर सुधार लाना चाहते है तो ! मै बिना किसी टिप्पड़ी के कुछ फतवों को यहाँ कॉपी कर रहा हूँ आपकी जानकारी के लिए,,,,, />“अब चूँकि इमराना के साथ उसके ससुर ने शारीरिक सम्बंध बना लिये है लिहाजा इमराना का पति अब इमराना के लिये बेटे समान है, इसलिये इमराना का पति, इमराना को तलाक दे! मुस्लिम महिलाओं का बेपर्दा होकर बात करना ग़ैर इस्लामी, मर्दा के साथ काम करना ग़ैर इस्लामी! देवबंद स्थित इस्लामिक शिक्षा संस्थान दारुल उलूम ने फतवा जारी कर कहा है कि मुसलमान योग गुरु बाबा रामदेव के कैंप में न जाएं क्योंकि उसकी शुरुआत में वंदेमातरम गाया जाता है! जेद्दाह : जेद्दाह में एक सऊदी अदालत ने पिछले साल सामूहिक बलात्कार की शिकार लड़की को 90 कोड़े मारने की सजा दी थी। उसके वकील ने इस सजा के खिलाफ अपील की तो अदालत ने सजा बढ़ा दी और हुक्म दिया: '200 कोड़े मारे जाएं।' लड़की को 6 महीने कैद की सजा भी सुना दी। अदालत का कहना है कि उसने अपनी बात मीडिया तक पहुंचाकर न्याय की प्रक्रिया पर असर डालने की कोशिश की। कोर्ट ने अभियुक्तों की सजा भी दुगनी कर दी। इस फैसले से वकील भी हैरान हैं। बहस छिड़ गई है कि 21वीं सदी में सऊदी अरब में औरतों का दर्जा क्या है? उस पर जुल्म तो करता है मर्द, लेकिन सबसे ज्यादा सजा भी औरत को ही दी जाती है। बेटी से निकाह कर उसे गर्भवती किया जलपाईगुड़ी : पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में एक व्यक्ति ने सारी मर्यादाओं को तोड़ते हुए अपनी सगी बेटी से ही शादी कर ली और उसे गर्भवती भी कर दिया है। यही नहीं , वह इसे सही ठहराने के लिए कहा रहा है कि इस रिश्ते को खुदा की मंजूरी है। सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि इस निकाह का गवाह कोई और नहीं खुद लड़की की मां और उस शख्स की बीवी थी। काहिरा : मिस्र में पिछले दिनों आए दो अजीबोगरीब फतवों ने अजीब सी स्थिति पैदा कर दी है। ये फतवे किसी ऐरे-गैरे की ओर से नहीं बल्कि देश के टॉप मौलवियों की ओर से जारी किए जा रहे हैं। देश के बड़े मुफ्तियों में से एक इज्ज़ात आतियाह ने कुछ ही दिन पहले नौकरीपेशा महिलाओं द्वारा अपने कुंआरे पुरुष को-वर्करों को कम से कम 5 बार अपनी छाती का दूध पिलाने का फतवा जारी किया। तर्क यह दिया गया कि इससे उनमें मां-बेटों की रिलेशनशिप बनेगी और अकेलेपन के दौरान वे किसी भी इस्लामिक मान्यता को तोड़ने से बचेंगे! नदवातुल उलेमा के प्राचार्य मौलाना सईदउर रहमान आज़मी नदवई,ने देवबंदके फतवे का समर्थन करते हुए कहा कि शरियत में इस सम्बन्ध में सख्त हिदायत है कि कामकाजी महिलाओं को दफ्तरों में काम करने वाले पुरुषों में घुल मिल नहीं जाना चाहिए|हालांकि जब मौलाना से पुछा गया कि इस फतवे के अमल में आने के बाद क्या लोक सभा में भी मुस्लिम महिलाएं अलग जगहों पर बैठेंगी, तो उन्होंने चुप्पी साध ली! बीमा पोलिसी पर फतवा जारी करते हुए देवबंद ने कहा कि बीमा योजनाओं से ब्याज जुटाना जुए के समान है जो कि इस्लामी रिवाजों के खिलाफ हैं। यह गैर कानूनी तरीके से पैसे कमाने के समान है! सलमान जी मुझे आपका जवाब नहीं चाहिए एक कुठित मानसिकता और पैमानों के दोहरे चश्मे कहाँ लगे है जरा सा सिर्फ इस पर विचार कर लीजियेगा

के द्वारा:

एक बार फिर मीडिया के कुछ लोगों ने अपने ज़हनी दिवालियापन का तमाशा लोगों को जम कर दिखाया। फतवे की आड़ में उन्होने भी अपनी ज़ुबान चलाई जिनकी नज़रे भी नहीं उठनी चाहिए थी। दारुलउलूम ने साफ कर दिया है कि उसकी तरफ से कोई फतवा जारी नहीं किया गया। लेकिन इस सब के बावजूद अगर मौजूदा माहौल और महिलाओं की बढती असुरक्षा और वर्कप्लैस पर होने वाले हरासमेंट को देखा जाए तो कोई भी माता पिता जब तक उसकी बेटी घर लौट कर नहीं आती बिना किसी भी फतवे के ही बेचैन रहता है। निरुपमा नाम की पत्रकार काम करने या अपने साथी से दोस्ती के दौरान प्रेगनेंट हो गई उसके मां बाप ने जो किया वो किसी फतवे का नतीजा नहीं था । इसके अलावा खुद महिला सघंटन वर्क प्लेस पर महिलाओं के शोषण और उनके साथ आए दिन होने वाले सलात्कार (जीं हां जब बात फैलती है तो उसको बलात्कार कहा जाता है और बात ना खुले तो सलात्कार ) के खिलाफ आवाजे उठाते रहे हैं। लेकिन उनकी आवाज़ सुनने की फुरसत किसे है। इसी मीडिया की कितनी एंकरों और महिला कर्मियों की कितनी अश्लील सीडी और एमएमएस बाजार में चल रही हैं ये सब जानते हैं..! मीडिया की कितनी ही महिला कर्मियों ने वर्कप्लेस पर होने वाले अपने शोषण से तंग आकर आत्म हत्या किस फतवे के तहत की ये कौन बताएगा..? इतना ही नहीं अगर लड़कियों के घर से बाहर काम करने या मर्दों के साथ काम करने जाने की बात हो तो हर शर्मदार और सुसंस्कृत माता पिता अपनी बेटी को यही हिदायत देगा कि बेटी मर्दों से ज्यादा घुलना मिलना मत, या ज़रा सोच समझ कर, या बेबाकी से परहेज करना। हालाकि माता पिता की इस नसीहत को भी फतवे की भाषा बनाया जा सकता है। ऐसे में कुछ कथित मुस्लिम बुद्दीजीवी भी अपने हाथ साफ करने से नहीं चूकते। जावेद अख्तर को सुरक्षा देने वाली पुलिस को चाहिए कि उनको धमकी देने वाले को भी तो सामने लाए। कि आखिर वो है कौन..? कहीं सनातन जैसी किसी संस्था का ही कोई सिरफिरा हुआ तो..? इसके अलावा जावेद अख्तर कब से इतने बड़े आलिम हो गये कि वो मज़हबी मामलो में भी दखल रखने लगे। आम मुसलमान हो या खास कोई भी अपनी बेटी या बेटे का निकाह अगर जावेद अख्तर से पढावा ले तो ज़रा बताएं ...? फतवों को बदनाम करने वालों ने ये कभी नहीं दिखाया कि इस्लाम ही एक ऐसा मज़हब है जिसके पैगम्बर(स.) ने फरमाया कि इल्म हासिल करो चाहे चीन ही क्यों ना जाने पड़े। इस हदीस में बेहद ख़ास बात है। वो ये कि उस जमाने में ना तो चीन में इस्लाम पहुचा था और ना ही चीन साइंस और टेक्नोलोजी में एंडावास था। अगर इल्म यानि शिक्षा को सिर्फ इस्लामी शिक्षा से जोडा जाता तो चीन के बजाए अरब बुलाने की बात होती। इसके अलावा इस्लाम ने महिलाओं को बाज़ारू या ताड़न की अधिकारी ना बना कर इज्जत और उसके कदमों में जन्नत तक रख दी है। लेकिन एक कुठित मानसिकता और पैमानों के दोहरे चश्मे लगाने वालो को प्रज्ञा ठाकुर पर चर्चा करने या नक्सलियों को आंतकी कहने में झिझक ही रहती है। लेकिन चूंकि हर बार हर मामले में चाहे इमराना हो या आई जी पांडया। कुछ लोगों के दोहरे पैमाने बन चुके हैं। अगर आधूनिक राधा आईजी पंड्या का नाम कोई सा खान होता तो उस को भी नए शगूफे की तरह पेश किया जाता। मर्द होकर पंडा की नथनी और साड़ी को भी कोई ना कोई मंज़हबी रूप दिया जाता। इस्लाम सिर्फ एक मज़हब ही नहीं, बल्कि ज़िन्दगी को जीने का एक मुकम्मल तरीका है। कानून होता ही इंसानों के लिए है, हैवान किसी कानून को कब मानते हैं.. साथ ही आलिमो को भी चाहिए कि हर मामले पर बोलने से पहले इस बात का ख्याल रखें कि आपकी एक गलत बात बहुत दूर तक और बहुत देर तक असर लाएगी।

के द्वारा: SALMAN SALMAN

आपकी बात से मुझे भी मेरी अम्मी याद आ गई। बहन आज हम जो मुकाम पे हैं वो हमारी अम्मी की बदौलत। अनपढ होते हुए वो ऐसी पढी थी कि उसने हमें दीन और दुनिया दोंनो6 तालिम दे रख़्खी थीं। रिश्तेदार तो हमारी पढाई के ख़िलाफ थे। पर वो डटी रहीं। हमें एक सबक़ दे रख्खा था कि इतना पढो कि दुनिया को जुका सको। अपने बेटों से रिश्ता करने के लिये अम्मी को हर तरहा से मज़बूर कर रहे थे लोग। यहाँ तक कहते थे "कौन ले जायेगा ऐसी पढी लिखी को। हमारे यहाँ तो ऐसे लडके नहिं हैं"।अम्मी एक ही बात कहती थी शादी का जोडा तो उपर तय होता है वक़्त आने पर मिल जायेगा अगर नहिं भी मिला तो मेरी बेटीयाँ खुद ईज़्जत से अपनी ज़िन्दगी संवार लेंगी। और आख़िर अम्मी कि महेनत रंग लाई। हमारा रिश्ता एक नवाबी ख़ानदान में हुआ। हमारे ससुर ख़ुद एक आई-ए-एस ओफ़िसर थे। उन्हें भी पढिलिख़ी बहुएं चाहिये थीं। जो हमारी शादी भी हो गई। आज हम बहोत खुश हैं। और आज जो मक़ाम पर हैं एक औरत "अम्मी" की बदौलत हैं। अल्लाह उन्हें जन्नत नसीब करे। आपकी बात पढकर बहोत ही सुकुंन पाया। चाँद बहन आपको और कामयाबी मिले यही मेरी दुआ है। आपने मेरी पोस्त को सराहा आपका बडा शुक्रिया।

के द्वारा:

RAZIA JI ME AAPKI BAAT SE BILKUL SAHMAT HU ME BHI EAK MUSLIM LADKI HU AUR ME YE JANTI HU AGAR HUM LOG IN FATVO ME PAD KAR RAH JAYENGE TO HUM MUSLIM KABHI AAGE NAHI BAD PAYENGE. HUM 3 SISTERS AUR 1 BROTHER HE AAJ SE 20 SAAL PEHLE HAMARE FATHER HUM LOGO KO CHHOD KAR CHALE GAYE AUR UNHONE DUSRI SHADI KAR LI MERI MUMMY PADI LIKHI NAHI THI ISLYE WO KAHI JOB NAHI KAR SAKTI THI MAGAR WO EDUCATION KI VALUE JANTI THI UNHONE SILLAI KAA KAAM KAR KARKE HUM CHARO KO PURI EDUCATION DI AAJ MERI BADI SISTER MEDIA ME HE ME APNA BUSINESS KAR RAHI HU MERI CHHOTI SISTER RANBAXY ME SCIENTIST HE AUR PHD KAR CHUKI HE MERE BHI KI APNI EAK MALL ME 4 SHOPS HE AGAR MERI MUMMY BHI YEHI SOCHTI KI ME JAISE SILLAI KA KAAM KAR RAHI HU YE BHI KARENGI TO AAJ HUM SAB JIS MUKAAM PAR HE KABHI NAHI PAHOCH PATE YE SIRF WO HI JANTA HE JIS PAR BITTI HE AGAR HUM BHI GHAR ME HI REHTE NA KHANE KO SAHI SE ROTI HOTI NA PENNE KO KAPDA HOTA . MERI MUMMY KO JO LADIES KAPDE SILLANE AATI THI KEHTI THI KI AAP IN LADKIYO KO BHI SILLAI ME LAGA LO ZIYADA PAISA KAMAOGI MAGAR MERI MUMMY NE KAHA KI NAHI JO KAAM ME KAR RAHI HU ME NAHI CHAHTI YE BHI KARE ME INKO ITNI EDUCATION DENA CHAHTI HU JITNA YE PADNA CHAHE KYOKI AAJ ME PADI LIKHI NAHI HU YE KAMI MUJHE PATA HE. TO FATVE SAHI HOTE HE MAGAR WO KIS HALAAT ME DIYE JAA RAHE HE WO DEKHNA CHAHIYE KAI BAAR INSAAN JANTA HE KI YE SAHI HE MAGAR USKO DUNIYA ME JEENA HE TO KUCHH CHEEZO KO UNDEKHA KARKE AAGE BADNA PADTA HE YEHI TO ZINDAGI HE JO ALLAH KE UKAM SE HAMARI MUMMY NE HUM LOGO KO DI HE ME HAMESHA US KHUDA KA AUR APNI MUMMY KA SHUKRIYA AADA KARTI HU. TO JO LOB FATVA MAAN SAKTE HE WO MANE JO NAHI MAAN SAKTE UNKO MAJBOOR NA KARE KI WO BHI MANE KYOKI KAI BAAR HALAAT IN FATVO KO MANNE SE INKAAR KAR DETE HE RAZIA JI AAPKA ARTICLE PADEKE BAHUT SARI CHEEZE TAZA HO GAI AAJ HUM LOG BAHUT KHUSH HE HUM SAB EAK HI GHAR ME MILKAR REH RAHE HE HASI KHUSHI THANKS RAZIA JI

के द्वारा:

खालिद भाई साहब,कोई भी धर्म इंसानियत के ऊपर नहीं है,मेरा विचार है की धर्म बना ही इंसान की बेहतरी के लिए है और हरेक धर्म के मूल सिद्धांत एक ही हैं,ये तो उस धर्म की मनमानी व्याख्या करनेवाले vested interest है जो अपनी ताक़त को बनाए रखने के लिए कमजोरों को कभी मज़बूत नहीं होने देना चाहते चूँकि इससे उनकी दुकानदारी जो बंद हो जाएगी,हरेक धर्म और समाज में ऐसा ही है,अपनी कमियों को हम नहीं देखेंगे तो उसे सुधारेंगे कैसे,रजिया बहन ने ठीक लिखा है,हम अपने घर में ,घर वालों के साथ ही इन मुद्दों को उठा रहे हैं,क्या हिन्दू धर्म में कमिया नहीं हैं?जो भी पुराना धर्म/मज़हब है उसमे कुरीतियाँ आ ही जाती हैं,हिन्दुओं में जातिवाद,दहेज़,अंधविश्वास जैसी बुराइयों की भी में निंदा करती हूँ और मानती हूँ की सभी को ऊपर वाले ने ही बनाया है तो कोई आपसे कमतर कैसे हो गया?क्या उसके पास पैसे कम हैं इसलिए?या उसके कपडे फटे हैं इसलिए?खालिद भाई मीडिया वाले बुरे करेंगे ये सोचकर क्या हम उन कमियों और जलालतों को धोते रहें?

के द्वारा:

वालैकुम सलाम ख़ालिदसाहब। आपकी कमेंन्ट पढकर पहले तो ये कहना चाहुंगी कि मैं दीनी और दुन्यवी दोनों तालिमे6 ठीक से हासिल कर चुकी हुं। मैं इस्लाम और उसकी हदीस के खिलाफ़ कभी नहि हुं। मैं भी जानती हुं कि फतवे का मतलब राये, मशवरा होता है, किसी ने कोई मसला दीनी एतबार से मालूम किया उसका जवाब आलिमों ने कुरान और हदीस की रौशनी में दे दिया पर उसका ये मतलब तो नहिं कि जैसे चाहे फतवे दें।  आप ही ने कहा है कि"औरत इस्लामी कानून के दाएरे में रहकर नौकरी या कारोबार कर सकती है । अगर फ़तवा देनेवाले यही बात कह देते तो कभी भी मैं ख़िलाफ नहिं थी। आप को मुझे ये बात कहने कि बज़ाय "उन लोगो को कही होती कि भाई फ़तवे तो सोच समजकर दिया करें। रही बात मेरे इमान कि मै ग़ुरुर से कह सकती हुं कि मैं मुस्लिम हुं। पर मेरा ईमान अल्लाह और उसके रसुल को फ़ोलो करता है। ना कि बेतुके लोगो से। मैं अपनी इज्जत से अपने घरबार और नौकरी को संभालती हुं।शायद इसी लिये मैं उनके दरबार में एक नहिं बल्कि चार चार बार सजदा करके आई हुं।  मैं नहिं बल्कि ऐसे फ़तवा देनेवालों ने मीडीया में इस्लाम को बदनाम कर रख़्खा है। शुक्रिया

के द्वारा:

रज़िया जी अस्सलामुअलेकुम, उम्मीद है खेरियत से होंगी आज आपका लेख पड़ा मालूम हुआ की आप काफी पड़ी लिखी हैं, लेकिन शायद जितनी दुनियावी तालीम आपने हासिल की है उसका शायद ही १० परसेंट दिनी तालीम से आपका वास्ता पड़ा हो, आप को यह मालूम होना चाहिए फतवे का मतलब राये, मशवरा होता है, किसी ने कोई मसला दीनी एतबार से मालूम किया उसका जवाब आलिमों ने कुरान और हदीस की रौशनी में दे दिया इसके ऊपर आप अमल करें या न करें यह आप की मर्ज़ी, इसमें इतना हो हल्ला करने की क्या ज़रूत है हाँ कुछ खास हालत में औरत इस्लामी कानून के दाएरे में रहकर नौकरी या कारोबार कर सकती है क्या आप नहीं जानती हज़रत खदीजा रज़ी० भी एक कामयाब बिज़नस वोमेन थीं,बस आपको और मुस्लिम औरतों को उनको फोल्लो करने की ज़रुरत है ,इस्लाम दुश्मन ताकतें खास तौर से मीडिया को इस्लाम के खिलाफ बोलने,प्रोपगंडा फेलाने का मौका मिलना चाहिए और आप जेसे लोग इस तरह का लेख लिख कर इनकी होसला अफजाई करते हैं.

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा: VIKASH JHA VIKASH JHA




latest from jagran