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सलाम एक ग़रीब की महानता को

Posted On: 26 Mar, 2010 में

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अम्मी को “केंन्सर’ होने की वजह से अम्मी को लेकर मुझे बारबार
रेडीएशन के लिये बडौदा ओंकोलोजी डिपार्टमेंन्ट में जाना होता था। शरीर के
अलग अलग हिस्सों के “केन्सर” से जूजते लोग और उनकी मृत्यु को थोडा दूर
ले जाने कि कोशिश करते उनके रिश्तेदारों से मिलना लगा रहता था। हांलाकि
मैं भी तो अस्पताल का ही हिस्सा हुं।
पर ये तो “केन्सर”!!!! ओह!
मरीज़ से ज़्यादा मरीज़ के रिश्तेदारों को देखकर दिल में दर्द होता था। एक
तरफ “केन्सरग्रस्त” का दया जनक चहेरा, दुसरी तरफ अपने कि ज़िंदगी कि एक
उम्मीद लिये आये उनके रिश्तेदार। बड़ा दर्द होता था। कोइ पेट के “केन्सर’
से जुज रहाथा तो कोइ गले के। कोइ ज़बान के तो कोइ गर्भाशय के! बडे बडे
लेबल लगे हुए थे “केन्सर” से बचने के या उसको रोकने के।
बडौदा जिले का ये बड़ा सरकारी अस्पताल है। यहाँ रेडीएशन
और् किमोथेरेपी मुफ़त में दी जाती है। देशभर से आये मरीज़ों का यहाँ इलाज
होता है। दूर दूर से आनेवाले मरीजों और उनके रिश्तेदारों के रहने के
लिये
अस्पताल के नज़दीक ही एक ट्र्स्ट “श्रीमती इन्दुमति ट्र्स्ट”
ने व्यवस्था कर रखी है, जिसमें मरीज़ों तथा उनके एक रिश्तेदार को दो वक़्त
का नाश्ता और ख़ाना दिया जाता है।
रहीमचाचा और आयेशाचाची भी वहीं ठहरे हुए थे।
आयशाचाची को गले का केन्सर था। हररोज़ के आनेजाने से मुझे उनके साथ बात
करना बड़ा अच्छा लगता था। कहते हैं ना कि दर्द बांटने से कम होता है मैं
भी शायद उनका दर्द बाँटने की कोशिश कर रही थी। घर से दूर रहीमचाचा
आयशाचाची अपने दो बच्चों को अपनी बहन के पास छोडकर आयेथे। उनका आज
तैइसवाँ “शेक”(रेडीएशन) था।
“कल और परसों बस बेटी अब दो ही शेक बाक़ी
हैं ,परसों दोपहर, हम अपने वतन को इन्दोर चले जायेंगे।“ रहीमचाचा ने कहा।
तो अपने बच्चों के लिये आप यहां से क्या ले जायेंगे? मैने पूछा। ”बेटी
मेरे पास एक हज़ार रुपे है। सोचता हुं आमिर के लिये बोल्बेट और रुख़सार के
लिये गुडिया ख़रीदुंगा। बेटी अब तो काफ़ी दिन हो गये है। अल्लाह भला करे इस
अस्पताल का जिसने हमारा मुफ़्त इलाज किया। भला करे इस ट्र्स्ट का जिसने
हमें ठहराया, ख़िलाया,पिलाया। और भला करे इस रेल्वे का जो हमें इस बिमारी
कि वज़ह से मुफ़्त ले जायेगी। अब जो पांचसो रुपये है देख़ें जो भी
ख़िलौने ,कपडे मिलेंगे ले चलेंगे।
उस रात को घर आनेपर मैने सोचा कि कल इन लोगों का आख़री दिन है मैं
भी इनके हाथों में कुछ पैसे रख़ दुंगी। दुसरे दिन जब मैं वहाँ पहुंची चाचा
चाची बैठे हुए थे। मैने सलाम कहकर कहा “चाची क्या ख़रीदा आपने? हमें भी
दिख़ाइये।“आज तो आप बडी ख़ुश हैं। “
चाची मुस्कुराइ, और रहीमचाचा के सामने शरारत भरी निगाह
से देख़ा। मैंने चाचा के सामने जवाब के इंतेज़ार में देख़ा। चाचा बोले” अरे
बेटी ये अल्लाह कि नेक बंदी से ही पूछ।
क्यों क्या हुआ?मैने पूछा!
रहीमचाचा बोले” कहती है’ हमने मुफ़त ख़ाया पीया तो क्या हमारा
फ़र्ज़ नहिं की हम भी कुछ तो ये ट्र्स्ट को दे जायें? अल्लाह भी माफ़ नहिं
करेगा हमें” बच्चों के लिये तो इन्दोर से भी ख़रीद सकते हैं। बताओ बेटी
अब मेरे पास बोलने के लिये कुछ बचा है?”
रहीम चाचा कि बात सुनकर मैं चाची को देख़ती रही। अपने आप से शर्म आने
लगी मुज़े।
हज़ारों कि पगारदार, कमानेवाली मैं!! एक ग़रीब को कुछ पैसे देकर अपनी
महानता बताने चली थी। पर इस गरीब की दिलदारी के आगे मेरा सर ज़ूक गया।
वाह1 आयशा चाची वाह!!
!सलाम करता है मेरा सर तूम्हें जो तुम मुझे इमानदारी का सबक़ दे गइ।

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27 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rahulpriyadarshi के द्वारा
May 10, 2011

मैं भी उन लोगों को सलाम भेजता हूँ,धन्यवाद आपका की आपने ऐसे लोगों के बारे में हमें बताया.बहुत बेहतरीन.

danishmasood के द्वारा
January 15, 2011

रज़िया जी………. आदाब सबसे पहले आप को टॉप टेन की बधाई| आप की कलम में ताकत है इसका सुबूत दुनिया के सामने है लिहाज़ा आप की लेखनी की तारीफ करना छोटे मुह बड़ी बात होगी | मेरी कविता \"सत्य की खोज में \"आप को पसंद आई ………होसलाअफजाई के लिए शुक्रगुज़ार हूँ आप से इल्तिजा है की मेरी कविताओं पे अपनी तनक़ीद पेश करें | शायद कुछ बेहतर सीख सकुं

दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
October 29, 2010

रजिया जी, आदाब भई आप के बारे में सुना तो बहुत था श्री अरविंद पारिख जी (भाईजी कहिन) से किंतु आप की कोई पोस्‍ट तक नहीं पंहुच पाया आज तक यह हमारी बदकिस्‍मती कहें या खुदा की मंजूरी आज आप के इस लेख को पढ़ कर एक बार तो आंखे नम हो ही गई। आप ने एक गरीब का कितना सजीव चित्रण किया है। परंतु यह ही सच्‍चाई है खुदा जिसे पैसे से महफूज रखता है तो उसे दिल बहुत बड़ा देता है। अमिर का तो पेट भरा होता है उसे यह चीजे दिखाई ही नही देती। एक दिल को छुने वाले लेख के लिए बहुत-बहुत बधाई। http://deepakjoshi63.jagranjunction.com

    raziamirza के द्वारा
    October 29, 2010

    आपकी सराहनीय कमेन्ट के लिए आपका हार्दिक आभार|

abodhbaalak के द्वारा
August 31, 2010

रज़िया जी, दिल को छू लाइन वाला लेख था, सच्चाई यही है की धनि वो नहीं है जिसके पास धन हो बल्कि वो है जो दिल से धनि है, मई आपको टॉप तें में आने पर बधाई नहीं दूंगा, बधाई दूंगा एक अच्छे और दिल को छो जाने वाले लेख पर, रंकिंग तो उपर नीचे होने वाली चीज़ है, असल सो आपके लेखन की दिल को छु लेने की कला है. ऐसे ही लिखती रहें

    razia mirza के द्वारा
    September 9, 2010

    शुक्रिया मेरी रचना को इतनी उंचाई से सराहने के लिये।

roshni के द्वारा
July 16, 2010

रजिया जी बहुत अच्छा सस्मरण. कहते है न की अमीर वोह है जिसका दिल अमीर है, और रहीम चाचा और चाची बहुत ज्यादा अमीर है… मेरी तरफ से सलाम उनकी ऊँची सोच को…

    raziamirza के द्वारा
    October 29, 2010

    शुक्रिया रोश्निजी

samta gupta kota के द्वारा
July 1, 2010

रज़िया जी,आपके सामाजिक सरोकारों के कारण मैंने आपकी लेखनी को हमेशा पसंद किया है,टॉप १० ब्लॉग स्टार में शामिल होने की वधाई,

    razia mirza के द्वारा
    July 1, 2010

    शुक्रिया समताजी। आपने मेरी लेखनी को जो सराहा। आभार व्यक्त करती हुं आपका।

ashutosh के द्वारा
June 30, 2010

राजिया जी पहले तो टॉप १० में आने के की लिए बहुत – बहुत बधाई बहुत ही अच्छा लेख !!!!!!!!!! आयशा चाची को मेरा भी सलाम

    razia mirza के द्वारा
    June 30, 2010

    शुक्रिया  आसुतोशजी  ! आपके कमेन्ट के लिये

Mohammad के द्वारा
June 29, 2010

मुबारक को विजेता के रूप मैं देख ख़ुशी हुई.

    razia mirza के द्वारा
    June 30, 2010

    बहोत बहोत शुक्रिया आपका।

mihirraj2000 के द्वारा
June 28, 2010

आपको भी मेरी तरफ से टॉप टेन में आने की हार्दिक बधाई…. शुभकामनाये.

    razia mirza के द्वारा
    June 30, 2010

    शुक्रिया मिहिरराज जी।

nikhil के द्वारा
June 28, 2010

टॉप टेन में चयन होने के लिए आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनाये…

    razia mirza के द्वारा
    June 30, 2010

    शुक्रिया निखिल जी

rajkamal के द्वारा
June 5, 2010

tap 20-20 me aa ne ke liye badhai

    razia mirza के द्वारा
    June 24, 2010

    शुक्रिया राजकमलजी।

    razia mirza के द्वारा
    June 30, 2010

    शुक्रिया राजजी।

NIKHIL PANDEY के द्वारा
March 28, 2010

रजिया जी आपका ये अनुभव छु गया ,,मन को ..और आपका लिखने का अंदाज़ काफी अच्छा लगा ….आपके और ब्लोग्स का इंतजार रहेगा ,,,शुभकामनाये……..

    razia mirza के द्वारा
    June 24, 2010

    शुक्रिया निखिलजी।

ASHISH RAJVANSHI के द्वारा
March 28, 2010

खुदा की मौजूदगी इसी को कहते हैं …… अगर आपने उनको पैसे दे दिए होते तो सोचिये की उनके दिल पर क्या बीतती | पर ऐसा हुआ नहीं , साथ ही जीवन की बहुत बड़ी सीख आपको मिली और उन ‘गरीबों’ का दिल टूटने से बच गया | अपने जीवन से जुड़े अनुभवों को हमारे साथ बाटते रहें और ख़ास तौर पर जानना चाहूँगा की आपकी अम्मी की तबियत कैसी है ? खुदा जल्द से जल्द उन्हें तकलीफों से निज़ात दिलाये | धन्यवाद |

    razia के द्वारा
    March 28, 2010

    आशिषजी आपकी कमेन्ट के लिये बहोत बहोत शुक्रिया। आपको ये जानकर अफ़सोस होगा कि 22 अप्रिल को अम्मी को गुज़रे हुए एक साल हो जायेगा। अम्मी से जूडी हर बात बांटना चाहुंगी क्योंकि अम्मी एक “माँ” के साथ साथ एक अच्छी गाईड भी थीं।

Tufail A. Siddequi के द्वारा
March 26, 2010

अस्सलाम वालेकुम, अच्छा और दिल को छूने वाला ब्लॉग लिखा है आपने. शुक्रिया.

    razia के द्वारा
    March 28, 2010

    शुक्रिया तुफैल साहब।


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