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दाता तेरे हज़ारों है नाम…

Posted On: 30 May, 2010 Others में

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nature

दाता तेरे हज़ारों है नाम…(2)

कोइ पुकारे तुज़े कहेकर रहीम,

और कोइ कहे तुज़े राम।…दाता(2)

ये धरती ये अंबर प्यारे,

चंदा-सुरज और ये तारे,

पतज़ड हो या चाहे बहारें,

दुनिया के सारे ये नज़ारे,

देख़ुं मैं ले के तेरा नाम।…दाता(2)

ऑंधी में तुं दीप जलाये,

पथ्थर से पानी तुं बहाये,

बिन देखे को राह दिख़ाये,

विष को भी अमृत तु बनाये,

तेरी कृपा हो घनश्याम।…दाता(2)

क़ुदरत के हर-सु में बसा तू,

पत्तों में पौंधों में बसा तू,

नदीया और सागर में बसा तू,,

दीन-दु:ख़ी के घर में बसा तू,

फ़िर क्यों में ढुंढुं चारों धाम।…दाता(2)

क़ुदरत पर है तेरा बसेरा,

सारे जग पर तेरा पहेरा,

तेरा ‘राज़’बड़ा ही गहेरा,

तेरे इशारे होता सवेरा,

तेरे इशारे होती शाम।…दाता(2)

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

subodhkantmisra के द्वारा
June 3, 2010

मेरा अपना मानना है रज़िया जी की आप जैसे लोगो की समाज को बेहद जरुरत है, मेरा अच्छा तुम्हारा खराब वाली या सिर्फ मेरा ही अच्छा वाली मानसिकता ने समाज को दूषित कर दिया है, अल्लाह आपको और अच्छा लिखने की तौफीक अता फरमाए !

    raziamirza के द्वारा
    June 4, 2010

    Subodhji, Thanks for your comment

manoj के द्वारा
May 31, 2010

वह एक ही है लेकिन उसके नाम तो हमने ही अलग अलग रख दिए लेकिन मान्यता के मामले में सबको समान स्थान प्रदान हैं.

    razia mirza के द्वारा
    June 25, 2010

    सही कहा आपने।


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