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तलाश ...!!!!!!!आसमाँ की...अमन की.....कारवाँ की

Posted On: 13 Jun, 2010 Others,लोकल टिकेट में

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मेरे पंख  मुझसे  न छीनलो,

मुझे आसमॉ की तलाश है।

मैं हवा हूँ मुझको न बॉधलो ,

मुझे ये समॉ की तलाश है।

मुझे माल ओ ज़र की ज़रुर क्या?

मुझे तख़्तो-ताज न चाहिये !

जो जगह पे मुझ को सुक़ुं मिले,

मुझे वो जहाँ की तलाश है।

मैं तो फ़ूल हूं एक बाग़ का।

मुझे शाख़ पे बस छोड दो।

में खिला अभी-अभी तो हूं।

मुझे ग़ुलसीतॉ की तलाश है।

न हो भेद भाषा या धर्म के।

न हो ऊंच-नीच या करम के।

जो समझ सके मेरे शब्द को।

वही हम-ज़बॉ की तलाश है।

जो अमन का हो, जो हो चैन का।

जहॉ राग_द्वेष, घृणा न हो।

पैगाम दे हमें प्यार का ।

वही कारवॉ की तलाश है।

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

राजेश, भागलपुर के द्वारा
June 22, 2010

अच्‍छी कविता है और अपनी भावनाओं को अभिव्‍यक्‍त करने की आपकी जो कला है वह उतनी ही अच्‍छी है। शुभाकामनाएं।

    razia mirza के द्वारा
    June 22, 2010

    राजेशजी आपकी प्रतिक्रिया मेरा उत्साह और भी बढाती रहेगी।आभार

Nikhil के द्वारा
June 14, 2010

बहुत अछि कविता है रज़िया जी. एक सामान सोच के लोगों को देख कर सुखद अनुभूति होती है. आभार, निखिल झा

    razia mirza के द्वारा
    June 14, 2010

    निखिलजी मेरी कविता को सराहने के लिये आभार।

kaushalvijai के द्वारा
June 14, 2010

bahut sundar rachna.

    razia mirza के द्वारा
    June 14, 2010

    शुक्रिया। कौशलजी।

samta gupta kota के द्वारा
June 14, 2010

well written rajia ji,keep it up, bharat needs the likes of u,एक शेर अर्ज है,”कौन कहता है आसमान में छेड़ नहीं हो सकता,एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो”

    razia mirza के द्वारा
    June 14, 2010

    सही कहा है आपने कौन कहता है आसमाँ में छेद नहिं हो सकता,एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो। गर दिल साफ है , नियत साफ़ है तो रब्बा भी हमारे साथ है।आपका बहोत बहोत शुक्रिया कमेन्ट और लाजवाब शे’र के लिये समताजी।

aditi kailash के द्वारा
June 14, 2010

अच्छी अभिव्यक्ति……

    razia mirza के द्वारा
    June 14, 2010

    शुक्रिया अदितीजी आपका।

chaatak के द्वारा
June 13, 2010

रज़िया जी, आपकी तलाश सचमुच इस जहां में जन्नत उतारने की तलाश है, दुआ है कि आपकी तलाश पूरी हो………………….. आमीन !

    razia mirza के द्वारा
    June 14, 2010

    बहोत बहोत शुक्रिया। कोशिश करना हमारा काम है। आगे ख़ुदा कि मरज़ी। आपकी बहेतरीन कमेन्ट के लिये शुक्रिया।

RASHID के द्वारा
June 13, 2010

अच्छी कविता है… लिखते रहिये Http://rashid.jagranjunction.com

    razia mirza के द्वारा
    June 13, 2010

    शुक्रिया रशिद साहब।


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