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......हमारे छूट जाते हैं.....

Posted On: 22 Jun, 2010 Others,लोकल टिकेट में

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बूरा जब वक़्त आता है, सहारे छूट जाते हैं।
जो हमदम बनते थे हरदम, वो सारे छूट जातेहै।

बड़ा दावा करें हम तैरने का जो समंदर से,
फ़सेँ जब हम भँवर में तो, किनारे छूट जाते है।

जो चंदा को ग्रहण लग जाये, सूरज साथ छोडे तो,
वो ज़गमग आसमाँ के भी सितारे छूट जाते है।

जिन्हें पैदा किया, पाला, बडे ही चाव से हमने।
जवानी की उडानों में, दूलारे छूट जाते है।

जो दिल में दर्द हो ग़र्दीश में जीवन आ गया हो तब,
कभी लगते थे वो सुंदर, नज़ारे छूट जाते है।

जो दौलत हाथ में हो तब, पतंगा बन के वो घूमे,
चली जाये जो दौलत तो वो प्यारे छूट जाते है।

मुसीबत में ही तेरे काम कोइ आये ना ‘रज़िया”
यकीनन दिल से अपने ही हमारे छूट जाते है

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

R K KHURANA के द्वारा
June 22, 2010

प्रिय रज़िया जी, बहुत ही सुंदर लिखा है अपने ! दिल का दर्द उकेर दिया ! साधुवाद ! राम कृष्ण खुराना

    razia mirza के द्वारा
    June 22, 2010

    आभार खुरानाजी

samta gupta kota के द्वारा
June 22, 2010

रज़िया जी,नेट पर आपका ब्लॉग मैं रोज़ तलाशती हूँ,हकीकत को बयां करती आपकी कविता अच्छी लगी,सच्चाई तो उपरवाला है,बाकी सब नश्वर है,झूठ है ,तो जो हमारे शास्वत सत्य माता-पिता हैं हम उनपे ही आस्था रखें और दुनिया के तौर-तरीकों को निर्विकार होकर नाटक के किरदार के तौर पर माने तो अफ़सोस कम होगा और ,एक quote है,किसका है याद नहीं,”our sweetest songs are those that tell of saddest thoughts”और जिस काम के लिए भगवान ने हमें संसार मैं भेजा है वो काम अच्छी तरह करते रहें ताकि अपने “माता-पिता”को जब हम ऊपर जाकर अपना रिपोर्ट कार्ड दिखाएँ तो उन्हें हम पर गर्व हो,

    razia mirza के द्वारा
    June 22, 2010

    सही कहती हैं आप कि जिस काम के लिए भगवान ने हमें संसार मैं भेजा है वो काम अच्छी तरह करते रहें ताकि अपने “माता-पिता”को जब हम ऊपर जाकर अपना रिपोर्ट कार्ड दिखाएँ तो उन्हें हम पर गर्व हो, वाकई आप का कहना जायज़ है। शुक्रिया मेरे ब्लोग को सराहने के लिये।

राजेश, भागलपुर के द्वारा
June 22, 2010

वाह क्‍या बयान-ए-हकीकत लिखी है। कविता की प्रस्‍तुति अच्‍छी है। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

    razia mirza के द्वारा
    June 22, 2010

    शुक्रिया राजेशजी आपकी प्रतिक्रिया के लिये।


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