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......क्यों देर हुई......

Posted On: 24 Jun, 2010 Others,लोकल टिकेट में

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क्यों देर हुई साजन तेरे यहाँ आने में?

क्या क्या न सहा हमने अपने को मनानेमें।

तुने तो हमें ज़ालिम क्या से क्या बना डाला?

अब कैसे यकीँ कर लें, हम तेरे बहाने में।

उम्मीदों के दीपक को हमने जो जलाया था।

तुने ये पहल कर दी, क्यों उसको बुझाने में।

बाज़ारों में बिकते है, हर मोल नये रिश्ते।

कुछ वक्त लगा हमको, ये दिल को बताने में।

थोडी सी वफ़ादारी गर हमको जो मिल जाती,

क्या कुछ भी नहिं बाक़ी अब तेरे ख़ज़ाने में।

अय ‘राज़’ उसे छोडो क्यों उसकी फ़िकर इतनी।

अब ख़ेर यहीं करलो, तुम उसको भुलाने में।

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

राजेश, भागलपुर के द्वारा
June 25, 2010

कविता अच्‍छी है। शुरूआत की ये पंक्ति – क्यों देर हुई साजन तेरे यहाँ आने में? क्या क्या न सहा हमने अपने को मनाने में पढ़कर तो मैने इसे मन ही मन गुनगुनाना शुरू कर दिया। रजिया जी, आपकी कविता एक बार पढ़ने से मन नहीं भरता है। आज जब दो दिन बाद जागरण जंक्‍शन पर आया तो आपके ब्‍लाग को ढूंढना शुरू किया। ब्‍लाग मिलने पर बांकी की तीनो रचना पढ़ा। कविता आप वाकई अच्‍छी लिखती हैं।

    razia mirza के द्वारा
    June 25, 2010

    शुक्रिया राजेशजी।  आपका बहोत बहोत शुक्रिया। जो आपने मेरी कविता को इतना सराहा।

samta gupta kota के द्वारा
June 24, 2010

रजिया जी,आपकी रचना कहीं खुदा को संबोधित तो नहीं है?

    razia mirza के द्वारा
    June 25, 2010

    जी नहिं। समताजी। ये रचना उस पर है जिस पर हम आँख़ें बंदकर के भरोसा करते हैं और वो हमारी भावनाओं का सीला कुछ इस तरहां देते हैं वो बेवफाओं पर है। ख़ुदा ऐसा तो नहिं होता। आपने मेरी रचना को प्रतिक्रिया देकर सराहा धन्यवाद।

R K KHURANA के द्वारा
June 24, 2010

प्रिय रज़िया जी, सबसे पहले आपको आपके बेटे का जनम दिन मुबारक ! भगवान् उसे लम्बी आयु दें ! मेरा आशीर्वाद ! आप अपना एक ही तख्खलुस रखें ! लय अपने आप आ जायगी ! लिखते समय ग्रामर का भी ख्याल रखें ! मेरी शुभकामनायें ! राम कृष्ण खुराना

    razia mirza के द्वारा
    June 24, 2010

    शुक्रिया ख़ुरानाजी! आप के आशिर्वाद का। आपकी बात  पर ध्यान देने की कोशिश ज़रूर करुंगी।

Nikhil के द्वारा
June 24, 2010

एक पंथ दो काज करते हुए आपकी कविता पर आपको बधाई और आपके पुत्र को हमारी तरह से उसके उज्वल भविष्य के लिए शुभकामना… आभार, निखिल झा

    razia mirza के द्वारा
    June 24, 2010

    आभार निखिलजी\ आपकी शुभकामनाओं के लिये। और कविता पर कमेंट के लिये भी।


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