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...झुमती ..गाती और गुनगुनाती गज़ल..

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झुमती गाती और गुनगुनाती गज़ल,

गीत कोइ सुहाने सुनाती गज़ल।

ज़िंदगी से हमें है मिलाती गज़ल,

उसके अशआर में एक इनाम है,

उसके हर शेर में एक पैगाम है।

सबको हर मोड पे ले के जाती गज़ल।

उसको ख़िलवत मिले या मिले अंजुमन।

उसको ख़िरमन मिले या मिले फ़िर चमन,

वो बहारों को फ़िर है ख़िलाती गज़ल।

वो इबारत कभी, वो इशारत कभी।

वो शरारत कभी , वो करामत कभी।

हर तरहाँ के समाँ में समाती गज़ल

वो न मोहताज है, वो न मग़रूर है।

वो तो हर ग़म-खुशी से ही भरपूर है।

हर मिज़ाजे सुख़न को जगाती गज़ल।

वो महोब्बत के प्यारों की है आरज़ु।

प्यार के दो दिवानों की है जुस्तजु।

हो विसाले मोहबबत पिलाती गज़ल।

वो कभी पासबाँ, वो कभी राजदाँ।

उसके पहेलु में छाया है सारा जहाँ।

लोरियों में भी आके सुनाती गज़ल।

वो कभी ग़मज़दा वो कभी है ख़फा।

वक़्त के मोड पर वो बदलती अदा।

कुछ तरानों से हर ग़म भुलाती गज़ल।

वो तो ख़ुद प्यास है फ़िर भी वो आस है।

प्यासी धरती पे मानो वो बरसात है।

अपनी बुंदोँ से शीद्दत बुझाती गज़ल।

उसमें आवाज़ है उसमें अंदाज़ है।

इसलिये तो दीवानी हुइ “राज़” है।

जब वो गाती है तब मुस्कुराती गज़ल।

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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

seema के द्वारा
June 30, 2010

ग़ज़ल एक ऐसी नायाब चीज़ जिसके लिए जितना लिखा जाए कम है , पर आपने जिस अंदाज़ से लिखा , पढ़कर बहुत अच्छा लगा |

    razia mirza के द्वारा
    June 30, 2010

    शुक्रिया सीमाजी। आपके कमेन्ट के लिये। आपने सही कहा कि ग़ज़ल एक ऐसी नायाब चीज़ जिसके लिए जितना लिखा जाए कम है

ajaykumarjha1973 के द्वारा
June 29, 2010

खूबसूरत पंक्तियां हैं रज़िया जी

    razia mirza के द्वारा
    June 30, 2010

    शुक्रिया अजयजी।

sumityadav के द्वारा
June 28, 2010

टॉप-10 में आने के लिए बहुत-बहुत बधाई रजिया जी।

    razia mirza के द्वारा
    June 30, 2010

    सुमितजी आभार।

ASHISH RAJVANSHI के द्वारा
June 28, 2010

आदाब रजिया जी , बेहतरीन ग़जल , कुछ शब्दों को समझने में कठिनाई हुई पर फिर भी मूल भाव समझ में आ ही जाता है | आपका और खुराना जी का नाम फ़ाइनल लिस्ट में देखकर बहुत ही खुशी हुई | भविष्य के लिए शुभकामनाये | धन्यवाद |

    razia mirza के द्वारा
    June 28, 2010

    शुक्रिया प्रतिक्रिया बदल। आपको बहोत दिनों के बाद एक ज़ोरदार विषय पर पाया। पर माफ किजीयेगा मैंने जो कमेंट लिखा पोस्ट नहिं हो पाया। पता नहिं क्यों?

R K KHURANA के द्वारा
June 28, 2010

प्रिय रज़िया जी, प्यारी ग़ज़ल ! शुभकामनायें राम कृष्ण खुराना

    razia mirza के द्वारा
    June 28, 2010

    शुक्रिया खुरानाजी।

sumityadav के द्वारा
June 28, 2010

बढ़िया गज़ल रज़िया जी। बधाई।

    razia mirza के द्वारा
    June 28, 2010

    शुक्रिया सुमितजी।

Tufail A. Siddequi के द्वारा
June 27, 2010

congratulations razia ji. http://siddequi.jagranjunction.com

    razia mirza के द्वारा
    June 27, 2010

    शुक्रिया तुफ़ैल साहब।

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    June 27, 2010

    Razia ji aadab, kuchh aur lekh likhe hai maine, aur aap se un par samikshatmak / aalochnatmak tippani ki guzaris hai. ummed karta hoo ki aap thoda kintu keemti samay de kar mujhe aashanwit banayengi. shukriya.

RASHID के द्वारा
June 27, 2010

रज़िया जी आज कल बहुत कम लिख रही है… सब खैर तो है… मेरा नया लेख इज्ज़त के नाम पर हत्याए देखा क्या ??

    razia mirza के द्वारा
    June 27, 2010

    जी नहिं रशीदसाहब हररोज़ एक पोस्ट लिखती हूं। हाँ बीच में थोडी सी डीस्टर्ब रही थी क्यों? पोस्ट पढना पता चल जाएगा। शुक्रिया कमेन्ट के लिये। अभी देख रही हुं  आपका लेख।


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