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जाने कहाँ से आया था महेमान बन के वो......

Posted On: 28 Jun, 2010 Others,लोकल टिकेट में

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जाने कहाँ से आया था महेमान बन के वो।

रहने लगा था दिल में भी पहचान बनके वो।

वो आया जैसे मेरा मुकद्दर सँवर गया।

मेरा तो रंग रुप ही मानो निख़र गया।

करने लगा था राज भी सुलतान बन के वो।

वो जानता था उसकी दीवानी हुं बन गई।

उसके क़्दम से मानो सयानी सी बन गई।

ख़्वाबों में जैसे छाया था अरमान बनके वो।

हरवक़्त बातें करने की आदत सी पड गई।

उस के लिये तो सारे जहां से मैं लड गई।

एक दिन कहाँ चला गया अन्जान बनके वो।

कहते हैं “राज़” प्यार, वफ़ा का है दुजा नाम।

इस पे तो जान देते हैं आशिक वही तमाम।

उस रासते चला है जो परवान बन के वो।

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
June 29, 2010

बहुत सुन्दर लिखा है आपने …………….

    razia mirza के द्वारा
    June 30, 2010

    शुक्रिया शैलेशजी।

Nikhil के द्वारा
June 29, 2010

अच्छी अभिव्यक्ति.

    razia mirza के द्वारा
    June 30, 2010

    शुक्रिया निखिलभैया

sumityadav के द्वारा
June 29, 2010

बहुत ही बढ़िया रचना। आपकी कलम में जादू है आपकी रचनाएं मन मोह लेती हैं और इसलिए आप टॉप10 में आई जिसकी आप हकदार भी हैं। बधाईयां।

    razia mirza के द्वारा
    June 30, 2010

    आपकी इन्स्पायर कर देनेवाली कमेन्ट के लिये बहोत बहोत शुक्रिया।

rkpandey के द्वारा
June 29, 2010

आदाब, रजिया जी एक ब्लॉग स्टार को मेरी बधाई स्वीकार हो! आप ने अपनी कलम की ताकत से आखिरकार यह मुकाम हासिल कर ही लिया. मुझे आशा है कि भविष्य में भी आपके रोचक, तेजतर्रार और रचनात्मक विचारों से साक्षात्कार होता रहेगा. एक नौसिखुआ लेखक

    razia mirza के द्वारा
    June 30, 2010

    पांडेजी। आपकी सबसे पहले आभारी इसलिये हुं कि आप मेरे ब्लोग के फोलोवर बने। दुसरा आभार इसलिये कि आपने मेरे टोप 10 में आनेको  कुछ इस तरहाँ पेश कीया कि मेरी कलम को और भी शक्ति मिल गई। 1)हवा पर भी दावा है इनका 2)कोई तो बताए हम होश में कब आएं 3)स्वार्थी तत्वों की भड़काई आग में जल रहा है देश 4)जिस्मफरोशी का नंगा सच 5)इंक्लुसिव ग्रोथ जिन्दाबाद सिर्फ एक नारा 6)कोई भिखारी शौक से नहीं बनता जैसे कईं महत्वपुर्ण पोस्ट लिखनेवाला नौ सिखिया कैसे हो सकता है भला?

allrounder के द्वारा
June 28, 2010

रज़िया जी, JAGRANJUNCTION ने आपके नाम फतवा, फतवा, फतवा जारी किया है ! टॉप – 10 मैं शामिल होने का मानेंगी या नहीं ? आपको, और मेरे सभी साथियों को जो, अंतिम १० मैं शामिल किये गए हैं, मेरी तरफ से हार्दिक बधाई, और आगे के लिए Good Luck !

    razia mirza के द्वारा
    June 28, 2010

    जी हाँ ओलराउन्डर जी आप भी तो मेरे इस फतवे में शामिल हैं। बधाई हो।

RASHID - Proud to be an INDIAN के द्वारा
June 28, 2010

शायद “राज़” आप का तखल्लुस है ???

    razia mirza के द्वारा
    June 28, 2010

    जी हाँ “राज” तख़ल्लुस है मेरा। कमेन्ट के लिये शुक्रिया।

RASHID - Proud to be an INDIAN के द्वारा
June 28, 2010

very nice razia ji…….

    razia mirza के द्वारा
    June 30, 2010

    शुक्रिया रशीद साहब।


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