मेरी आवाज सुनो

मेरी आवाज़ ही पहचान है॥

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हँस के जी ले प्यार से और मुस्कुराता तूं चलाजा।

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आदमी है, आदमी से मिल मिलाता तू चलाजा।

गीत कोइ प्यार के बस गुनगुनाता तू चलाजा।

गर तुझे अँधियारा राहों में मिले तो याद रख़,

हर जगह दीपक उजाले के जलाता तू चलाजा।

जो तुझे चूभ जायें काँटे, राह में हो बेखबर,

अपने हाथों से हटा कर, गुल बिछाता तू चलाजा।

सामने तेरे ख़डी है जिंदगानी देख ले,

बीती यादों को सदा दिल से मिटाता तू चलाजा।

”राज़” हम आये हैं दुनिया में  ज़ीने के लिये।

हँस के जी ले प्यार से और मुस्कुराता तू चलाजा।


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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
July 6, 2010

गर तुझे अँधियारा राहों में मिले तो याद रख़, हर जगह दीपक उजाले के जलाता तू चलाजा। बहुत सुन्दर कुछ सिखाती बताती पक्तिया,

    raziamirza के द्वारा
    July 7, 2010

    बेहद ख़ुशी हुई आपके कमेन्ट देखकर। आभार।

Manoj के द्वारा
June 30, 2010

बहुत ही सुन्दर कविता रजियाजी …

    razia mirza के द्वारा
    June 30, 2010

    शुक्रिया मनोजजी।


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