मेरी आवाज सुनो

मेरी आवाज़ ही पहचान है॥

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देख़ो आई रुत मस्तानी.

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देख़ो आई रुत मस्तानी..(2)

आसमान से बरसा पानी..

देख़ो आई रुत मस्तानी..(2)

पत्ते पेड़ हुए हरियाले।

पानी-पानी नदियां नाले।

धरती देख़ो हो गई धानी। देख़ो आई रुत मस्तानी..(2)

मेंढक ने जब शोर मचाया।

मुन्ना बाहर दौड़ के आया।

हंसके बोली ग़ुडीया रानी।

देख़ो आई रुत मस्तानी..(2)

बिज़ली चमकी बादल गरज़े।

रिमझिम रिमझिम बरख़ा बरसे।

आंधी आई एक तुफ़ानी।

देख़ो आई रुत मस्तानी..(2)

कोयल की कुउ,कुउ,कुउ सुनकर।

पपीहे की थर,थर,थर भरकर।

राज़हो गई है दीवानी।

देख़ो आई रुत मस्तानी..(2)

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
July 6, 2010

बहुत अच्छी कविता …………….

    raziamirza के द्वारा
    July 7, 2010

    आभार शैलेशजी मेरी कविता को सराहने के लिये।

राजेश, भागलपुर के द्वारा
July 5, 2010

प्रकृति की प्राकृतिक छटा का अपने शब्‍द एवं चित्र के माध्‍यम से आपने बहुत ही सजीव चित्रण किया है।

    razia mirza के द्वारा
    July 5, 2010

    शुक्रिया राजेशजी।

R K KHURANA के द्वारा
July 2, 2010

प्रिय रज़िया जी, सुंदर ! बच्चो को यह कविता बहुत पसंद आयेगी ! राम कृष्ण खुराना

    razia mirza के द्वारा
    July 3, 2010

    बहोत दिनों के बाद दिखाई दिये खुरानाजी। कमेन्ट के लिये आभार।


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