मेरी आवाज सुनो

मेरी आवाज़ ही पहचान है॥

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.... तैयार सिपाही हो जा।

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TIRANGA

सरहद ने दी आवाज़,

तैयार सिपाही हो जा।

दुश्मन ना आया बाज़ ‘

तैयार सिपाही हो जा।

है ऑधी चली उधर से, ये धुंधला हुआ समॉ है।

ये फिज़ाओं में डर कैसा? ये सुर्ख़ आसमॉ क्यों है?

आफत का है आग़ाज़ !… तैयार सिपाही हो जा।

माथे पे लगाके टीका,मॉ-बाप की आशिष ले ले,

बच्चों को उठाके गोदी, कुछ प्यार दे थोड़ा ले ले।

पत्नी को बतादे राज़,… तैयार सिपाही हो जा।

बहना से बंधवा राख़ी,वो रहना जाये बाक़ी।

यारों से करले मस्ती, फिर मिले ना ऐसी बस्ती।

ये गॉव ना हो नाराज़!… तैयार सिपाही हो जा।

तेरी चाल में शान हो ऐसी ,एक वीर सिपाही जैसी!

तेरी ऑख में गरमी ऐसी, एक वीर सिपाही जैसी!

वाह! क्या तेरा अंदाज़!… तैयार सिपाही हो जा।

वर्दी को बदन पे अपनी, तू कफ़न समझकर पहन ले।

भारत के वीर सिपाही, ये वतन का जतन करले।

और हो जा तू परवाज़!… तैयार सिपाही हो जा।

मेरे लाख़ प्रणाम वो मॉ पर, तुझे जिसने जनम दीया है।

मेरे लाख़ प्रणाम पिता पर ,तेरा जिसने जतन किया है।

तुझ पे है बड़ा हमें नाज़!… तैयार सिपाही हो जा।

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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

babu lal meena के द्वारा
October 23, 2010

This Song are very good i like it. i am aim is i am make a sepahi .

Saba Perween के द्वारा
September 9, 2010

रज़िया जी, बहुत सुन्दर कविता… aap ne likha hai………

I.S.RATHORE के द्वारा
August 14, 2010

रजिया जी, आपकी (एक तरह से वीर सैनिक को समर्पित करने जैसी स्टेप बाई स्टेप लिखी हुई ) कविता पढी/ पुराने समय में राजाओं के राज में सैनिक /योद्धा लड़ाई लड़ने के लिए जाता था तो इसी तरह से अपने परिवार से माता, पिता, भाई,बहन, बच्चों व अपनी अर्धांगनी से विदाई लेकर जाता था / इस कविता को पढ़कर पुराने योद्धाओं की समर्पण की भावना की याद को ताजा कर दिया / धन्यवाद आई .एस. राठोड़

    razia mirza के द्वारा
    August 21, 2010

    शुक्रिया राठोर साहब | आपकी कमेन्ट मुझे और भी inspired करती है आभार|

आर.एन. शाही के द्वारा
August 14, 2010

रज़िया जी बहुत-बहुत बधाइयाँ । आपकी वीररस से ओतप्रोत इस रचना से वतनपरस्ती की बरसात हो रही है … शाही ।

    razia mirza के द्वारा
    August 21, 2010

    शुक्रिया |

R K KHURANA के द्वारा
August 14, 2010

प्रिय रज़िया जी, सप्ताह का ब्लागर बनने पर आपको बधाई ! राम कृष्ण खुराना

    razia mirza के द्वारा
    August 21, 2010

    शुक्रिया खुराना भी साहब|

Arunesh Mishra के द्वारा
July 10, 2010

रज़िया जी, बहुत सुन्दर कविता…

    raziamirza के द्वारा
    July 10, 2010

    मिश्राजी। आभार आपकी कमेन्ट बदल।

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
July 9, 2010

रजिया जी आपकी देशभक्ति की कविता पढ़ी बहुत अच्छी लगी आपने वीर सैनिकों की वीरता का अच्छा वर्णन किया है लेकिन रजिया जी हमारे देश के नेता न जाने कब इन वीर सैनिकों की वीरता का सही आकलन करेंगे और उनकी शहादत को उचित सम्मान देंगे. नवीन कुमार शर्मा बहजोई ( मुरादाबाद) 09719390576

    raziamirza के द्वारा
    July 10, 2010

    शुक्रिया।  नवीनजी आपने मेरी कविता को जो सराहा। आपकी बात सच है कि हमारे देश के नेता कहाँ इन वीरों को सम्मान दे पाते हैं? पर अभी उम्मीद बाक़ी है।

samta gupta kota के द्वारा
July 9, 2010

रज़िया जी,फौजियों की हमारे जीवन में भूमिका को हम प्रणाम करते हैं,आम आदमी की रक्षा के लिए ये न सिर्फ सरहद पर जान हथेली पर रखकर लड़ते हैं बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के समय भी जब सिविल प्रशासन हाथ खड़े कर देता है तो इन्हें ही याद किया जाता है,आम आदमी के मन मैं फौजियों के लिए बहुत आदर का भाव रहता है,लेकिन अफ़सोस तब होता है जब इन्हें राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है इन नेताओं द्वारा,अच्छा पोस्ट धन्यवाद,

    raziamirza के द्वारा
    July 10, 2010

    समता जी मैंने आपको अपनी एक पोस्ट सुपुर्द किया है आपने पढी क्यों नहिं? “ए धूप कि किरन” आपकी हक़ीक़त भरी कमेन्ट के लिये शुक्रिया।

राजेश, भागलपुर के द्वारा
July 8, 2010

सचमुच देश के वीर सिपाही देश की आन-बान-शान है। भारत के उन वीर सिपाहियों की बदौलत ही हम अपने घर में सुरक्षित हैं। देश के लिए मर-मिटने का जज्‍बा रखने वाले वीर सिपाहियों को मेरा भी लाख-लाख प्रणाम।

    raziamirza के द्वारा
    July 10, 2010

    आपका कहना लाजमी है। कि वीर सिपाही की बदौलत ही हम अपने घरों में सुरक्षीत हैं। शत शत प्रणाम उन वीरों पर…

sumityadav के द्वारा
July 8, 2010

बहुत अच्छी कविता रजियाजी। आपने सिपाही के जीवन उसकी वीरता, उसके अंदाज, परिवार के प्रति उसके प्रेम का बहुत अच्छा चित्रण किया। बधाई।

    raziamirza के द्वारा
    July 10, 2010

    बहोत बहोत शुक्रिया सुमितजी।

chaatak के द्वारा
July 8, 2010

“मेरे लाख़ प्रणाम वो मॉ पर, तुझे जिसने जनम दीया है। मेरे लाख़ प्रणाम पिता पर ,तेरा जिसने जतन किया है। तुझ पे है बड़ा हमें नाज़!… तैयार सिपाही हो जा।” रज़िया जी, क्या खूब लिखा है आपने | इतनी अच्छी पंक्तियाँ लिखने पर आपको बधाई और कोटि नमन उन माता-पिता को जो ऐसे शेर पैदा करते हैं | जय हिंद ! जय भारत !

    raziamirza के द्वारा
    July 10, 2010

    बहेतरीन कमेन्ट के लिये शुक्रिया चातकजी। जय हिन्द जय भारत

Manoj के द्वारा
July 8, 2010

रजिया जी, आपकी कविता बहुत अच्छी लगी है.

    raziamirza के द्वारा
    July 10, 2010

    आभार मनोजजी प्रोत्साहित करने के लिये।

R K KHURANA के द्वारा
July 8, 2010

प्रिय रज़िया जी, देशभक्ति की बहुत सुंदर कविता ! इसी सन्दर्भ में मैंने एक क्षणिका “प्रणाम” लिखी है तो इसी ब्लॉग पर है ! कविता के लिए साधुवाद ! राम कृष्ण खुराना

    raziamirza के द्वारा
    July 10, 2010

    शुक्रिया। खुरानाजी, आपकी कमेन्ट पाकर बहोत अच्छा लगा। मैं प्रणाम पढुंगी।


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