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...तेरे बिन " जागरण"

Posted On: 10 Jul, 2010 Others,लोकल टिकेट में

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jagran

वैसे तो मेरा ट्रांसफर   हुए एक महिना हो चुका है पर “बाबा” के मौत की वजह से नई जगह पर जोइन्ट करते ही  एक महिने की छुट्टी पर रही जिससे

उनका क्रिया कर्म भी हो जाये। बाबा तो नहिं रहे पर घर के काम से निपटते ही मेरा ज़्यादातर वक़्त जागरण जंकशन पर ही पास होने लगा। वो तो जैसे

मेरा एक साथीदार बन गया। अपनी हर बात को एक रचना का रुप देकर मैं सुब्ह से शाम तक लिखती रहती। पढती रहती।

तन्हाई में मेरा साथी जो बन चुका था वो। पता ही नहिं चला कि मेरी लिखी बात कभी नंबर का स्वरुप ले लेगी!!!  अपने ब्लोग को 1 से 10 नबरों में पाकर

मुझे और भी आनंद आने लगा। हालाकि अब कोंटेस्ट तो खतम हो चुका है पर जागरन का नशा अब भी मुझ में छाया हुआ है। घर में इंटरनेट जो है तो

आतेजाते मन कि बात लिखती-पढती रहती हुं। पर अब…?

अब जागरण की जुदाई कैसे सह पाउंगी मैं? मेरा जहाँ तबादला हुआ है वो एक मध्यस्थ जेल डीस्पेनसरी है। वहां ना तो नेट है ना मोबाईल!!! मेरा सर्विस

अवर है सुब्ह 8.30 से दोपहर 12.30 और दोपहर 3-30 से 6.30 शाम तक।

अब बात ये है कि मुझे जो क्वाटर्र मिला है वहाँ ना तो टेलिफ़ोन कनेक्शन है फ़िर नेट की तो बात ही कहाँ? फ़िर भी मैं हिंमत हारनेवाली नहिं हुं। जल्द ही

कोशिश करुंगी कि टेलीफ़ोन और नेट दोनों ही ले लुं।

पर बात तो है जुदाई कि!!! जागरण जंकशन और तमाम जागरण से जुडे ब्लोगरों  कि जुदाई की है।

पता नहिं ये जुदाई कब तक सहनी होगी?

एक आदत-सी पड  गई है जागरण जंकशन की।

ये एक ऐसा जंकशन है कि जहाँ हर तरहाँ के लोग अपने विचार बिना किसी संकोच लिख पाते हैं। आज वो

साथी से मैं बिछ्ड रही हुं।

आज मेरी आखरी रात है जी चाहता है बहोत……सी पोस्ट लिख दुं सारी रात जागकर।

कल 10 बजे अपनी नयी जगह पर चली जाउंगी परसों अपनी ड्युटी पर जाना जो है।

पता नहिं ये लं….बी जुदाई कब ख़त्म होगी?

एक “परिवार को छोडकर जाना बेहद मुश्किल होता है।

“जागरण जंकशन “से जैसे मैंने  एक परिवार ही तो पाया था।

तुम बहोत याद आओगे!!!! कैसे रहेंगें तुम बिन हम?

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ASHISH RAJVANSHI के द्वारा
July 11, 2010

रजिया जी , हम तो आपकी आवाज सुनने को सदैव बेचैन रहते हैं | थोडा कष्ट जरूर हो रहा है आपके दूर होने का पर इस विश्वास के साथ की जल्द ही आपकी वापसी होगी | जानना चाहूँगा की कहाँ पर तबादला हुआ है आपका | हमारे लायक कोई भी सेवा हो तो तुरंत याद करें | धन्यवाद

    razia mirza के द्वारा
    July 15, 2010

    कमेन्ट के लिए शुक्रिया आज नेट पर आनेका मौका मिलते ही आप लोगो के कमेन्ट पढ़कर जवाब देने बैध गई हूँ| मेरा तबादला सेन्ट्रल जेल डिस्पेंसरी बरोड़ा हुआ है | ‘मेरी आवाज़ सदा गूंजती रहेगी आप लोगों का समर्थन है जो | खुशी की बात ये है की मई जल्द ही नेट कनेक्शन ले रही हूँ|

drsinwer के द्वारा
July 10, 2010

हिमत mat harna duty bhi jaruri hai wo aik doha hai sat mat hari mahra sayba sat harya pat jay sat ki bandi laxmi fir malaigi aay so humari subh kamnai apkai saat hai apki yatra mangalmay ho

    razia mirza के द्वारा
    July 15, 2010

    मै आपकी कमेन्ट की बड़ी आभारी हूँ जल्द वापस आउंगी |

aditi kailash के द्वारा
July 10, 2010

रज़िया जी, उम्मीद ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप जल्द ही इस मंच पर वापस आएँगी…. All the best!!!!

    razia mirza के द्वारा
    July 15, 2010

    शुक्रिया अदितीजी जल्द वापस आउंगी अभी मौका मिला मै अपने मेल चेक करने से पहले ही जागरण पर बैढ़ गई हूँ|

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
July 10, 2010

रज़िया दीदी हम लोग भी आप की अच्छी कविताओ, ग़ज़लों, गीतों और प्रेरक बातों के दौर के फिर से जल्दी ही आ जाने का इतेज़ार करेंगे …………………….. और आप से यही गुजारिश करेंगे की आप फिर से जल्दी से जल्दी नेट कनेक्शन ले कर हम लोगो से जुड़ जाएँ ……………… वैसे आप नेट कनेक्शन के लिए ज्यादा परेशानी मत उठाइएगा, हमें उम्मीद है आपको नेट कनेक्शन जल्दी ही मिल जाएगा …….

    razia mirza के द्वारा
    July 15, 2010

    शैलेशजी आपकी भावनाओ की क़द्र करती हूँ | आपने मुझे दीदी कहा है मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा है| मई जल्द ही नेट कनेक्शन ले रही हूँ बस थोडा इंतज़ार और|

chaatak के द्वारा
July 10, 2010

रज़िया जी, आपका तबादला हमारे जागरण-जंक्शन परिवार के लिए किसी सदमे से कम नहीं | आप बहुत याद आएँगी | जितनी जल्दी हो सके नेट कनेक्शन ले लीजियेगा | हम आपका हर रोज़ इंतज़ार करेंगे | आपकी यात्रा शुभ-मंगलमय हो | आप जहाँ भी जाएँगी हमारी शुभकामनाएं आप के साथ होंगी | मुझे पूरा विश्वास है कि ये विछोह ज्यादा लम्बा नहीं होगा | All the best ………

    razia mirza के द्वारा
    July 15, 2010

    आपकी भावनाओं की क़द्र करती हूँ और आजा चांस मिलते ही नेट पर आ गई आप लोगो को प्रतिक्रया का जवाब देने के लिए | मै कोशिश में ही हु| नेट कोन्नेसिओं जल्द ही ले लुंगी|

राजेश, भागलपुर के द्वारा
July 10, 2010

रजिया जी, जागरण जंक्‍शन से जुड़ने के उपरांत जिस भी दिन जागरण जंक्‍शन पर आने का मौका मिलता है मैं सबसे पहले आपका पोस्‍ट ही पढ़ता रहा हूं क्‍योंकि आपकी लिखी रचना काफी अच्‍छी एवं पठनीय होती हैं। जागरण जंक्‍शन से दूर होने के उपरांत निश्चित रूप से आपकी कमी खलेगी। आपको हमारी शुभकामनाएं है साथ ही मुझे इंतजार भी रहेगा आपकी अगली कविता का।

    razia mirza के द्वारा
    July 15, 2010

    शुक्रिया राजेशजी आपकी बहेतरीन कमेन्ट का | मै आज नेट पर आई हूँ और आप सब को ये बताने ही आई हूँ की मै जल्द ही नेट कनेक्शन ले लुंगी |आपकी शुभकामनाओ के लिए आभार| आपका इन्तेजार जल्द खत्म होगा|

sumityadav के द्वारा
July 10, 2010

आपका जागरण जंक्शन से इस तरह जाना दुखद है। आपने अपने बेहतरीन रचनाओं से इस मंच को गुलजार किया है। साथ ही हम जैसे नौसिखुओं की हौसलाअफजाई भी। आप बड़ी अजीब स्थिति में है एक तरफ काम है तो दूसरी तरफ जागरण जंक्शन परिवार। आशा करता हूं वहां जाकर आप कोई न कोई इंतजाम कर ही लेंगी इस परिवार से फिर संपर्क साधने का। आपका इंतजार रहेगा….

    razia mirza के द्वारा
    July 15, 2010

    सुम्ताजी आपकी कमेन्ट के लिए बहोत बहोत शुक्रिया | मै जल्द ही जागरण परिवार में आ रही हूँ बस कुछ दिन ही की बात है|

allrounder के द्वारा
July 10, 2010

रजिया जी, आप का ये लेख पढ़कर मुझे बहुत दुःख हो रहा है, मुझे ऐसा लग रहा है, मेरे परिवार का कोई एक सदस्य हमें मजबूरी मैं छोड़कर जा रहा है, और हम बेबस परिवार वाले कुछ नहीं कर पा रहे हैं ! मैं हास्य – व्यंग जरुर लिखता हूँ किन्तु मैं बहुत भावुक इंसान हूँ और मुझे आपके जाने का बड़ा दुःख है ! हम आपके अल्लाह और अपने भगवन से दुआ करेंगे की जल्द ही आप फिर से इस परिवार से जुड़ें ! तब तक के लिए खुदा हाफ़िज़ !

    raziamirza के द्वारा
    July 10, 2010

    आपकी भावपूर्ण कमेन्ट के लिये बहोत बहोत शुक्रिया। जागरण के द्वारा हम लोग अपने आप के साथ साथ परिवार को भी बहोत करीब से जानने लगे थे। आपके कमेंट ने मुझे सचमुच रुला दिया। अपने परिवार का सदस्य कहकर आपने मुझे जो सम्मान दिया है आपकी शुक्र गुज़ार हुं। दुआ है कि आपकी दुआ रंग लाये। ख़ुदा हाफ़िज।

RASHID के द्वारा
July 10, 2010

रज़िया जी हम लोगो को छोड़ कर मत जाइये, प्लीज़ ,, कोई भी इन्तेजाम करिए लेकिन jagranjunction पर आप की उपस्थिति बहुत ज़रूरी है,, प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़ Raashid

    raziamirza के द्वारा
    July 10, 2010

    रशीद साहब। मैंने बताया कि मुझे तो 1 महिने पहले ही जाना था।  पर अब छुट्टी ख़त्म हो गई है। देखें कि वहाँ क्या इंतेज़ाम कर सकती हुं। आपके लगातार कमेन्ट मेरी हौसला अफ़ज़ाई करते रहे हैं। दुआ करो कि मैं फ़िर से आप सब से ज़ुड पाउं। ख़ुदा हाफ़िज


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