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.......ये बंधन टूटेना

Posted On: 19 Aug, 2010 Others,लोकल टिकेट में

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ये बंधन टूटेना

चाहे कोई बाधा आये, चाहे आये तूफ़ॉ ।

ये बंधन टूटेना ।(2)

साथ कभी छूटेना…ये बंधन टूटेना

ये बंधन टूटेना।(2)

मेरी चाहत इतनी ग़हरी, जीतना सागर ग़हेरा।

मेरी चाहत इतनी ऊंची, जितना नभ ये ऊँचा।

हाथ कभी छूटेना…ये बंधन टूटेना

तूँ मेरी साँसों में समाया, तू मेरी आहों में।

दिल की धड़कन नाम पुकारें, तेरा दिन-रातों में।

सांस मेरी छूटेना…ये बंधन टूटेना

तुझको चाहा, तुझको पूजा बनके मीरां मैने।

ढूंढा तुझको हर एक मोड पे बनके राधा मैने।

प्यार मेरा छूटेना… ये बंधन टूटेना

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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jalal के द्वारा
August 20, 2010

ek baar kavita likhne ka shauk chadha tha. woh do chaar din hi mein mar khap gaya. itna mushkil ke poochho mat. ek line likhne ke baad dusri line mili hi nahi. shaayad saari umar bhi main likh nahi paaun. aapki taareef hi hai jo itni achchhi tarah se likh leti hain. aapko likhne ki chahat aur bhi aaye.

    razia mirza के द्वारा
    August 20, 2010

    आपका बड़ा शुक्रिया जो इतनी तारीफ करदी | खेर ये कोई बड़ी बात थोड़ी है ? थोडा गुनगुनाओ शब्द अपने आप मिलते चले जाते है.| और एक बार शब्द मिलते चले ख़ुद बा खुद कविता बनाती चली जाती है| कोशिश करके देखो मै सच कहती हु या नहीं?कविता में जवाब दीजियेगा|

आर.एन. शाही के द्वारा
August 20, 2010

आपकी भावप्रवण रचनाएँ मन को छूती हैं रज़िया जी … बधाई । आपकी कविता में कई जगह ‘ट’ शब्द हैं, जो आपने सही लिखा है । फ़िर ‘टूटेना’ की जगह हर बार आपने ‘तूटेना’ क्यों लिखा, ये समझ में नहीं आया । यदि यह त्रुटिवश है, तो कृपया भविष्य में इसका अवश्य ख्याल रखें ।

    razia mirza के द्वारा
    August 20, 2010

    शुक्रिया शाहीजी| मेरी रचनाओं को सराहने के लिए| मैंने अपनी त्रुटि भी ठीक करली है|

R K KHURANA के द्वारा
August 20, 2010

प्रिय रज़िया जी, सुन्दर अभिव्यक्ति ! राम कृष्ण खुराना

    razia mirza के द्वारा
    August 20, 2010

    शुक्रिया खुराना भाई साहब| भाभी जी कैसी है?

samta gupta kota के द्वारा
August 20, 2010

रजिया जी,सुन्दर भावात्मक अभिव्यक्ति,कहाँ थीं इतने दिन?

    razia mirza के द्वारा
    August 20, 2010

    मै ऐसी जगह हूँ जहाँ मोबाइल या नेट चल नहीं पाते| मेरा ट्रान्सफर सेंट्रल जेल बरोदा हुआ है| इसीलिए कभी वक़्त मिलने पर घर आना होता है तो नेट पर आ जाया करती हूँ.| कमेन्ट के लिए आभार |

Ramesh bajpai के द्वारा
August 20, 2010

रजिया जी  ” टूटेना” शब्द नहीं आ पाया सुन्दर भाव

syeds के द्वारा
August 19, 2010

रज़िया जी आप बहुत अच्छा लिखती हैं और एक बार फिर आपने यह साबित कर दया. syeds.jagranjunction.com

    razia mirza के द्वारा
    August 20, 2010

    शुक्रिया syeds sahab


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