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......तेरी गवाही

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तेरी गवाही हमें आनेवाले एक नये दिन का संदेश देती है।

तेरी गवाही के लिये हमलोग तुझे ढूंढते रहते हैं आसमान में।

पर तूं है कि …….छूप जाता है कभी बादलों में। कभी पेडों के पीछे,

हर नये महिने की शुरुआत, तेरी गवाही के बिना मंज़ूर नहिं।

आज भी इंतेज़ार है रोज़दारों को तेरी गवाही का।

कि तूं आज आसमान में नज़र आयेगा।

और एक महिने के रोज़दार , एक महिने कीईबादत के बाद….

तेरी गवाही के बाद कल ईद मनायेंगे।

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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

नवनीत श्रीवास्तव के द्वारा
September 10, 2010

रजिया जी आपको ईद की शुभकामनाएं…..। 

    razia mirza के द्वारा
    September 10, 2010

    बहोत बहोत आभार। आपको भी गणेशपर्व की शुभकामनाएं।

sumityadav के द्वारा
September 10, 2010

बहुत ही सुंदर कविता रज़ियाजी। कसम से मैं तो हर बहुत लंबी-चौड़ी प्रतिक्रिया देना चाहता हूं पर वो शब्द ही नहीं मिलते जो आपकी लेखनी की खूबसूरती को बयां कर सकें। बस इतना ही कहना  चाहता हूं आपकी हर रचना दिल को छू जाती है। ईद मुबारक। जागरण जंक्शन पर फिर से आपका स्वागत है।

    razia mirza के द्वारा
    September 10, 2010

    बहोत आभारी हुं आपकी जो इतनी ख़ुबसुरती से मेरी रचना को सराहा। आपके कमेंट से ही मैं इंन्स्पायर होती रही हुं और रहुंगी। आपको गणेशपर्व की शुभकामनाएं।

आर.एन. शाही के द्वारा
September 10, 2010

कम लाइनों में ही सारगर्भित रचना । ईद की भी ढेर सारी बधाइयाँ ।

    razia mirza के द्वारा
    September 10, 2010

    आपको भी गणेशपर्व की शुभकामनाएं।

Ramesh bajpai के द्वारा
September 9, 2010

रजिया जी ईद कल है | फिल हल तो यही कहना चाहिए ” कितनी खुसी ले के आया चाँद ईद की ” बहुत बहुत बधाई , मुबारक हो आपको कल की ईद

    razia mirza के द्वारा
    September 10, 2010

    बहोत बहोत आभार आपकी कमेन्ट के लिये। आपको गणेशपर्व की शुभकामनाएं।

roshni के द्वारा
September 9, 2010

रजिया जी, इतनी सुन्दरता से चाँद को बुलाया आपने .. की चाँद कभी छुपना भी नहीं चाहेगा … ईद मुबारक हो आपको…

    razia mirza के द्वारा
    September 10, 2010

    आपको भी मुबारक। शुक्रिया

chaatak के द्वारा
September 9, 2010

रज़िया जी, एक निराले अंदाज़ में आपने चाँद को दावत दे दी, उसे ईद का मेज़बान भी बना लिया और मेहमान-ए-ख़ास भी | मेरी तरफ से आपको आज ही ईद मुबारक हो !

abuzarusmani के द्वारा
September 9, 2010

जी चाँद तो निकला ही नहीं ………….advance में ईद की मुबारकबाद शुक्रिया अबुज़र ओस्मानी

    razia mirza के द्वारा
    September 9, 2010

    जी हाँ “चाँद” ने गवाही कहाँ दी है? आपको भी एडवांस में ईद मुबारक।

R K KHURANA के द्वारा
September 9, 2010

प्रिय रज़िया जी, सुंदर कविता के लिए बधाई ! खुराना

    razia mirza के द्वारा
    September 9, 2010

    शुक्रिया।


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