मेरी आवाज सुनो

मेरी आवाज़ ही पहचान है॥

88 Posts

766 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1412 postid : 355

"क्षितिज के उस पार या इस पार???"भाग- 3

Posted On: 9 Oct, 2010 Others,लोकल टिकेट में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

 

      आज  सब चहेरों पर ख़ुशी है क्यों की “श्री योगक्षेम मानव संस्थान मानव अधिकार” के कार्यकर्ता कुछ वकीलों के साथ यहाँ आनेवाले थे| जिन बंदिओं के वकील नहीं हैं उन्हें काय्दाकीय मदद करनेके लिए आ  रहे थे| जो बंदी ६० साल के ऊपर के है उनके नाम लिखे जा रहे थे शायद सरकार या सुप्रीम कोर्ट से उन लोगों की रिहाई की अपील की जानी थी|” मंजू माँ “अपने बोखे मुंह से मेरी और देखकर मुस्कुरा रही थी|

यहाँ के सभी बच्चे भी रंगीन कपड़ों में  तैयार होकर बैठे थे| क्यूं की आज उन्हें भी बगीचे में और सर्कस दिखने को ले जानेवाले हैं| सब की नज़र दरवाज़े पर लगी हुई थी की एक बेल बजी| बच्चों की किलकारियां गूंज उठीं| बंदी महिलाएं अपनी साड़ियों को ठीक करने लग गयी| और वो लोग आ गए| एक के बाद एक के नाम बोले गए | सभी कुछ “उम्मीदों ‘ के साथ अपने अपने नाम लिखवाने लगे|
     आज “फिजा”, बाबू” और सभी बच्चे खुश है क्यों की उन्हें इस बड़े “दरवाज़े’ के उस पार की दुनिया देखना है| पता नहीं सर्कस किसे कहते है| “हाँ’ ये पता है की आज बिल्ली और बन्दर के अलावा कोइ और भी  पशु/ पक्षी  देखने को मिलेंगे | आज बच्चों को संस्थान तरफ से तरहां तरहां के खिलौने और पेन,किताबें,टोपी और कपडे मिले हैं|

यहाँ एक उम्मीद है की कब बोर्ड पर केस आ जाये और वो निर्दोष हो जाए| जिनके केस सुप्रीम कोर्ट से भी रिजेक्ट हो चुके हैं उन्हें तो पता है की उनकी ज़िन्दगी के १४ साल यहीं कटने वाले हैं ये उन्हों ने स्वीकार भी कर लिया है|

उन्हें न तो “बाबरी मस्जिद या रामजन्मभूमि” के विवाद से मतलब है या इलेक्शन के परिणाम से मतलब !!!

 वो तो जब संगीत सिखानेवाली दीदी के साथ बैठकर “राग भूपाली” ,मालकौंस ,मेघ,दुर्गा, के आरोह,अवरोह में अपनी ज़िन्दगी की सरगम को गुनगुनाते रहते हैं| तो कभी सिलाई सिखानेवाली दीदी के सहारे सिलाई मशीनों में डूब जाते है तो कभी कढहाई/बुनाई के रंगीन धागों में अपने जीवन के सालों को बुनने लग जाते हैं|५५ साल की  “कमरुन्निसा” कहती हैं की मुझे अब नजदीक का कम देखता है पर ऐनक लगाकर भी सीख जाउंगी और अपनी नाती-पोती को अपना हुनर सिखालाउंगी| “सीता” अंग्रेजी सीख रही है| कहती है जब बाहर जाउंगी तो फटाफट अंग्रेजी बोलकर सब को चोंका दूंगी| पर उसे ये नहीं पता की हर महीने सरकारी अस्पताल में जो इंजेक्शन लेने जाना पड़ता है वो “कीमोथेरेपी” है| और अभी उसकी बीमारी चौथे स्टेज पर है|
 “मधु” को एक अजीब इन्फेक्शन उसके पतिने दिया है| वो तो भगवान के पास चला  गया पर उसे HIV देकर चला गया|  अब उसे भी cd4 count के लिए हर बार अस्पताल ले जाया जाता है|

अजीब दुनिया है ये!!!!

पर इतना ज़रूर कहूँगी यहाँ न तो उंच-नीच के भेद है ना तो धर्मो के भेद है और ना ही प्रान्तों के भेद यहाँ तो सारा के सारा भारत बसा है| यहाँ हर त्यौहार बड़े ही चाव से मनाया जाता है | चाहे गणेशचतुर्थी हो या नवरात्री| या गरबा या रमजान !!!!
यहाँ सम्पूर्ण भारत दर्शन होता है|

पर दर्दो-गम के बीच|

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

21 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

R K KHURANA के द्वारा
October 10, 2010

प्रिय रज़िया जी, लगता है छुट्टी मिल गयी ! सुंदर लेख ! राम कृष्ण खुराना

    razia mirza के द्वारा
    October 10, 2010

    शुक्रिया खुराना भाई साहब| पर आज ही छुट्टी है कल फिर ड्यूटी जाना है |

chaatak के द्वारा
October 10, 2010

रज़िया जी, इतने दिनों बाद आपके दर्शन हुए| आपका लेख दिल को छू लेने वाला है | दर्दो-गम स्वयं अपने आपमें धर्म और सम्प्रदाय दोनों होते हैं और ये किसी भी दूसरे धर्म से ज्यादा ताकतवर होते हैं| यही कारण है कि चारागर और हमदर्द दिल के सबसे करीब होते हैं और सबसे मज़बूत रिश्ता बनाते हैं|

    razia mirza के द्वारा
    October 10, 2010

    चारागर और हमदर्द दिल के सबसे करीब होते हैं और सबसे मज़बूत रिश्ता बनाते हैं| सही कहना है आपका चातकजी| आभार इतनी बहेतर प्रतिक्रिया के लिए|

RASHID के द्वारा
October 10, 2010

रज़िया जी !! बहुत दिनों के बाद आप की रचना देख कर दिल खुश हो गया, पता नहीं क्यों जंक्शन के पुराने साथी धीरे धीरे कम होते जा रहे है !! राशिद http://rashid.jagranjunction.com

    razia mirza के द्वारा
    October 10, 2010

    रशीद साहब कमेन्ट के लिए आपका शुक्रिया| मैं फ़िलहाल ऐसी जगह पर हु जहां नेट नहीं है | जब भी अपने घर छुट्टी पर आती हूँ जागरण पर ही आ जाती हूँ| और अभी मेरा मक्का जाने का ऑडर आगया है वहां से आने के बाद १००% नेट कनेक्शन ले लुंगी| दुआ करना

    RASHID के द्वारा
    October 12, 2010

    रज़िया जी, आप मक्का जा रही है, शायद हज के लिए,, अल्लाह का शुक्र है,, मेरी गुज़ारिश है की आप मेरे लिए भी दुआ करे,, दुआ करे की मुल्क में अमन चैन कायम रहे और अल्लाह पाक सब पर अपना करम फरमाए !! राशिद

syeds के द्वारा
October 10, 2010

रज़िया जी ,सुन्दर रचना, बहुत दिनों के बाद आपकी कोई पोस्ट की. वेलकम बैक

    syeds के द्वारा
    October 10, 2010

    रज़िया जी ,सुन्दर रचना, बहुत दिनों के बाद आपकी कोई पोस्ट पढने का मौका मिला . वेलकम बैक

    razia mirza के द्वारा
    October 10, 2010

    शुक्रिया सैयेद साहब | आपने मेरी गेरमोजुदगी में भी मेरी पोस्ट को सराहा है आपका शुक्रिया| अभी मेरा मक्का मेडीकल mission में जानेका आर्डर हुआ है वापस आते ही नेट कनेक्शन ले लुंगी |दुआ करना|

    syeds के द्वारा
    October 12, 2010

    रज़िया जी अल्लाह आपको धीर सारी खुशियाँ दे.दुआओं में हमें भी याद रखियेगा…

Dharmesh Tiwari के द्वारा
October 10, 2010

आदरणीया रजिया जी एक बार फिर सुन्दर पोस्ट देखने को मिली,बधाई

    razia mirza के द्वारा
    October 10, 2010

    आभार आपका धर्मेश्जी

Ramesh bajpai के द्वारा
October 9, 2010

रजिया जी पोस्ट के साथ आपकी वापसी ने हर्ष को दुगुना कर दिया . बधाई

    razia mirza के द्वारा
    October 10, 2010

    आभार बाजपेयीजी आपकी कमेन्ट के लिए|

rajkamal के द्वारा
October 9, 2010

आदरणीय रज़िया जी ..नमस्कार … अब आपको ही यह फैसला करना है की…. ज्यादा देर… जागरण मंच के इस पार या उस पार …

    razia mirza के द्वारा
    October 10, 2010

    शुक्रिया आपकी कमेन्ट के लिए

abodhbaalak के द्वारा
October 9, 2010

रजिया जी, काफी समय के बाद आपकी कोई रचना पढने को मिली. आपकी क्षितिज श्रेणी की सभी लेख ही अत्यंत मर्म्स्पर्शीय हैं और संवेदनाशील भी, हर बाद पढने के बाद अगले लेख का इंतज़ार रहता है. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    razia mirza के द्वारा
    October 9, 2010

    शुक्रिया अबोध्जी|

आर.एन. शाही के द्वारा
October 9, 2010

रज़िया जी लौटते ही आपने अपने संस्मरण का अगला भाग पढ़ने का मौक़ा दिया । बधाइयां ।

    razia mirza के द्वारा
    October 9, 2010

    shukriyaa shahee sahab|


topic of the week



latest from jagran