मेरी आवाज सुनो

मेरी आवाज़ ही पहचान है॥

88 Posts

766 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1412 postid : 357

मुझे मेरा "वतन" बहोत...........याद आ रहा है|

  • SocialTwist Tell-a-Friend

 

kaba

 

आज मै “मक्का “हूँ जो की अल्लाह का घर है  जिसे कहते है “खान-ए-काबा” |

 यहाँ सारी दुनिया के लोग हज के अरकान पूरा करने आते हैं| 

सारा के सारा पाक माहोल नज़र आता है|
 

मैं यहाँ अपने वतन से दूर अल्लाह के घर आई हूँ|

अपनी माटी से दूर रहकर अपने वतन की जुदाई क्या होती है मैंने ये महसूस किया है|

मै दिल से अपने रिश्तेदारों के साथ साथ अपने प्यारे वतन की दुआ करती हूँ|

 ” हमारे वतन में सदा ही भाईचारा-शान्ति बनी रहे “|

 ”अल्लाह सभी को नेक तौफीक दे और भटके हुओं को सही राह दिखाए ऐसी दुआ करती हूँ|

 सारी दुनिया से आतंकवाद का साया दूर हो और  शान्ति बनी रहे|
     

“जागरण” ही सही प्लेटफोर्म है जो हमारी आवाजों को सभी तक बहोत आसानी से पहोचाता है|

जो लोग इस्लाम को बदनाम कर रहे है जो ज़रा आकर यहाँ का नज़ारा तो देखें की “इस्लाम” किसे कहते है?

 “अल्लाह” ने कभी ये नहीं कहा की बन्दूक की नोक पर इस्लाम को बदनाम करो यहाँ सभी लोग खामोशी से अपनी अपनी दुआ और

नमाजो में मशगुल होते है|


  पर हाँ | एक बात ज़रूर कहूँगी मुझे मेरा “वतन” बहोत………..याद आ रहा है|
    

सिर्फ दो महीने के लिए आई हूँ पर जब भी कोई हमवतन  मिलता है  मै बड़ी खुश हो जाती हूँ|
     

आज मौक़ा मिलते ही अपने “जागरण” पर आकर बैठ गयी हूँ|

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

29 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

smma59 के द्वारा
November 24, 2010

आप की वतन से मुहब्बत की मैं कद्र करता हूँ. अल्लाह से दुआ है की आप खैरियत से हज्ज कर के वापस आ जाएं. हमारे लिए भी दुआ किजेगा.

Dharmesh Tiwari के द्वारा
October 31, 2010

रज़िया जी आदाब,इस समय आप उस जगह पर पहुंची है जहाँ सब कुछ एक सामान है और जहाँ सबको कुछ मांगने का सामान अधिकार भी है तो हो सके तो परवर दिगार के दरबार में मेरे तरफ से भी विश्व में अमन के लिए एक गुहार जरुर लगाईयेगा,धन्यवाद!

    razia mirza के द्वारा
    October 31, 2010

    जी ज़रूर मैंने पहली दुआ इस दरबार में यही की है की दुनिया भर में अमनो अमान हो| आपकी तरफ से ज़रूर दुआ पहोचाना मेरा फ़र्ज़ हो जाता है

दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
October 31, 2010

रजिया जी, आदाब, भई हमें नहीं मालूम था कि आप खुदा कि इबादत में है और फिर भी आप ने अपने वतन के लोगों से संपर्क बानाया हुआ है। अल्‍लाह करे आप जिस मकसद से उस परवरदीगार के दरबार में हाजरी देने गई है आप की मनोकामना पूरी हो। और उस के सजदे के कुछ छिटें तो हम पर भी पडेगें क्‍योंकि आप वहां होते हुए भी हम सभी से संपर्क मे जो है। शायद आप के कारण हमारी हाजरी भी उस दरबार में लग ही गई। धन्‍यवाद, वतन पहुंच कर ब्‍लॉग पर फिर नई शक्ति से आप के आने के इंतजार में ………….. -दीपकजोशी63

    razia mirza के द्वारा
    October 31, 2010

    शुक्रिया दीपकजी आपकी बहेतरीन कमेन्ट के लिए| आपको मै ये ज़रूर कहना चाहूंगी की मै यहाँ पांचवी बार आई हूँ| कुछ अपनों की दुआ है और अल्लाह की मर्ज़ी भी | आपने ये कहकर मुझे बहोत ख़ुशी दी है की आपकी हाजरी भी खुदा के दरबार में लग गई. फिर एक बार तहे दिल से आपका शुक्रिया अदा करती hun

आर.एन. शाही के द्वारा
October 30, 2010

रज़िया जी पाक सरज़मीन से भेजी गई इस बेहतरीन पोस्ट पर बधाई क़ुबूल फ़रमाएं । धन्यवाद ।

    raziamirza के द्वारा
    October 30, 2010

    शुक्रिया !!!

rajkamal के द्वारा
October 30, 2010

नहीं मेरी किस्मत में इस ज़न्म में कि मैं देखूं मदीना मदीने वाले को मेरा सलाम कहना !

    raziamirza के द्वारा
    October 30, 2010

    जी ज़रूर

R K KHURANA के द्वारा
October 30, 2010

प्रिय रज़िया जी, आप इस समय मक्का में है ! खुदा की इबाबत में हैं ! इससे अच्छी और क्या बात हो सकती है ! वहां रहकर भी आपने हम सुब का ख्याल रखा यह भी बड़ी बात है ! आप खुदा से प्रार्थना कीजिये की हमारे देश से भ्रष्टाचार समाप्त हो जाय ! और रब सबको सद्बुद्धि दे ! अपने वतन से दूर जाकर तो वतन यद् आता ही है ! आपके जज्बे को सलाम राम कृष्ण खुराना

    raziamirza के द्वारा
    October 30, 2010

    शुक्रिया खुराना साहब ! भाभीजी को मेरा प्रणाम !

NIKHIL PANDEY के द्वारा
October 30, 2010

रजिया जी आपका “खान-ए-काबा” का ये प्रवास बहुत सुखद हो और आपकी तमाम उम्मीदे पूरी हो हमारी शुभकामना आपके साथ है.. आप जल्द ही अपने वतन लौटे और अपने इष्ट मित्रो से मिले…..

    raziamirza के द्वारा
    October 30, 2010

    शुक्रिया पांडेजी

Rashid के द्वारा
October 30, 2010

रज़िया जी… सलाम अलैकुम,, अल्लाह आप की इबादतों और दुआओ को कुबूल फरमाए और सब पर रहम करे !! राशिद

    raziamirza के द्वारा
    October 30, 2010

    आमीन सुम्मा आमीन

abodhbaalak के द्वारा
October 30, 2010

रज़िया जी, काफी समय के पश्चात आपका कोई पोस्ट देख कर अच्छा लगा, इश्वर करे की आप फिर जल्द से अपने देश की मट्टी की खुशबू सूंघे, अपना देख अपना ही होता है http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    raziamirza के द्वारा
    October 30, 2010

    आपकी दुआ जो हमारे साथ है

SYEDS के द्वारा
October 29, 2010

रज़िया जी, बेहद ख़ुशी हुयी आपकी पोस्ट देखकर, खूबसूरत और सकारात्मक लेख दुआओं में याद रखियेगा. http://syeds.jagranjunction.com

    raziamirza के द्वारा
    October 29, 2010

    इन्शाअल्लाह|

Ritambhara tiwari के द्वारा
October 29, 2010

हमारे वतन में सदा ही भाईचारा-शान्ति बनी रहे “ एक सकारात्मक लेख! बधाई

    raziamirza के द्वारा
    October 29, 2010

    तिवारीजी आपकी कमेन्ट के लिए आपका बड़ी आभारी हूँ| जो आपने मेरे लेख को सराहा|

October 29, 2010

सारी दुनिया से आतंकवाद का साया दूर हो और शान्ति बनी रहे| अच्छे लेख के लिए हार्दिक बधाई………….

    raziamirza के द्वारा
    October 29, 2010

    शुक्रिया पंतजी|

Alka Gupta के द्वारा
October 29, 2010

वतन और हम रिश्ता ही बड़ा प्यारा है अपने वतन के प्रति व्यक्त की गईं भावनाओं के प्रति हमारा शतशत नमन।

    raziamirza के द्वारा
    October 29, 2010

    बेशक वतन की याद तो मेरे दिल दिमाग पर छाई हुई है| मुझे गर्व है की मैं भारतीय हूँ

nishamittal के द्वारा
October 29, 2010

आपकी वतन के प्रति भावनाओं को मेरा नमन.

    raziamirza के द्वारा
    October 29, 2010

    आभार निशाजी

Ramesh bajpai के द्वारा
October 29, 2010

रजिया जी आज आपकी पोस्ट पढ़ बहुत कर अच्छा लगा . आप दो महीने बिता कर स्वदेश आ जाय हम सब आपकी परिवार समेत सलामती की दुआ करते है

    raziamirza के द्वारा
    October 29, 2010

    आभार बाजपेयीजी आपकी भावनात्मक कमेन्ट के लिए|


topic of the week



latest from jagran