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.प्यार !!जुदाई में तडपते ख़ामोश "अहेसास" का नाम ही तो है!!!

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प्यार ये कहने का नहिं महसूस करने का नाम है।

वक़्त ने साथ छोड़ा हमारा जो था,

हाय तेरा, तड़पना मुझे याद है।

मुंह छिपाकर तेरा मेरी आगोश में,

हाय कैसा बिलख़ना मुझे याद है।…हॉ मुझे याद है।

प्यार की वादीओ में गुज़ारे जो पल,

कैसे दिल से ओ साथी भूला पायेंगे?

जिन लकीरों पे कस्मे जो खाइ थीं कल,

आज हम वो लकीरें मिटा पायेंगे?

उन रक़ीबों के ज़ुल्मों को मेरे सनम,

हाय तेरा वो सहेना मुझे याद है। हॉ मुझे याद है।

ख्वाब हमने सज़ाये थे मिलकर सनम।

एक घरौंदा सुनहरा बनायेंगे हम।

साथ तेरा रहे, साथ मेरा रहे।

हमने ख़ाईं थीं इक-दूसरे की कसम|

उन वफ़ाओं की राहों में मेरे सनम,

आज भी सर ज़ुकाना मुझे याद है। हॉ मुझे याद है.

क्या करें मेरे महबूब अय जानेमन!

हम भी वक़तों के हाथों से मजबूर हैं।

ना नसीबा ही अपना हमें साथ दे।

ईसलीये ही तो हम आज यूं दूर है।

हिज्र के वक़्त में ओ मेरे हमसुख़न।

आज तेरा सिसकना मुझे याद है। हॉ मुझे याद है.

हाय चलती हवाओं उसे थाम लो।

ठंडी-ठंडी फ़िज़ाओ मेरा नाम लो।

सर से उस के जो पल्लू बिख़र जायेगा,

आहें भर के ये माशुक़ मर जायेगा।

याद जब जब करेंगे हमें “राज़” तब।

हाय मेरा तड़पना मुझे याद है।

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Manish Singh "गमेदिल" के द्वारा
February 2, 2011

मेरा दिल कहता है – रजिया जी आपकी याद न जाने क्या क्या याद दिलायेगी………………………. किस्मत ही है जब खफा, बेवफा फिर तुम नहीं, रंज इतना है “गमेदिल” राहों में तू संग नहीं……………”

Alka Gupta के द्वारा
February 2, 2011

राज़ियाजी , बहुत ही सुन्दर अहसास ! सुन्दर रचना !

    razia mirza के द्वारा
    February 2, 2011

    शुक्रिया अल्काजी

Dharmesh Tiwari के द्वारा
February 2, 2011

रजिया जी……………………..वक़्त ने साथ छोड़ा हमारा जो था, हाय तेरा, तड़पना मुझे याद है। मुंह छिपाकर तेरा मेरी आगोश में, हाय कैसा बिलख़ना मुझे याद है।…हॉ मुझे याद है।……………….बहुत खूब,धन्यवाद!

    razia mirza के द्वारा
    February 2, 2011

    शुक्रिया धर्मेशजी|

Bhagwan Babu के द्वारा
February 1, 2011

रजिया जी, मै जानता हूँ आप एक अच्छी लेखिका है, अच्छा लिखा है आपने , सबके दिल को छू लेगा क्योकि आपकी कविता के गहरे मेँ एक दर्द है, दर्द का एहसास हर किसी को छू लेता है। दुनिया का हर एक धर्म लोगो से दुखो की बात करता है, आँसुओँ की बात करता है, और प्रेम करने के लिये कहता है, तो इन दुखो और आँसुओ के बीच पला-बढा प्रेम सिर्फ बिछडने को, तडपने को, याद मे रोने को प्रेम कह सकता है बस और कुछ नही. जबकि प्रेम उन खिले हुये फूलों की तरह है जो हमेशा मुस्कुराता रहता है, खुश्बू बिखेडता रहता है। सुखने के बाद भी उसमे से प्रेम की गन्ध आती रहती है।

    razia mirza के द्वारा
    February 2, 2011

    जी भगवान बाबू आपकी बात से सहमत हूँ| प्रेम तो हमेशां खुशबू बिखेरता रहता है| पर मेरी रचना तो एक बिछड़े हुए जोड़े की है | जिसे कविता का स्वरूप देना चा है मैने | आपकी कमेन्ट के लिए आभार| और भी कमेन्ट का ईतेजार रहेगा|

rajkamal के द्वारा
February 1, 2011

आदरणीय रज़िया जी …सादर आभिवादन ! आप बहुत ही समझदार है , अच्छा किया जोकि रज़िया को खुद ही राज़ बना दिया …. वर्ना इस पुरुष प्रधान समाज ने वक्त बीतते -२ इतिहास की किताबो में इस को वैसे भी राज बना ही देना था …. ************************************************************************* बहुत ही बेहतरीन कविता गहरे एह्साह लिए हुए दिल को छू लेने वाले … बधाईयाँ

    razia mirza के द्वारा
    February 1, 2011

    आदरणीय rajkamalji मेरा अपना तखल्लुस ही \"राज़\" है| रही बात कविता /ग़ज़ल की ये तो मैंने जागरण की जून १६ २०१० की पोस्ट जिसकी लिंक http://listenme.jagranjunction.com/2010/06/16/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%9D%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%B9%E0%A5%88/ है पर पोस्ट कर चुकी हूँ पर जब आज \"प्यार\" के नाम कुछ लिखना ही है तो वही रचना क्यों न लिखें जो एक अहेसास दिला दे प्यार का सही कहाना!!!राजकमल जी !! शुक्रिया आपकी कमेन्ट के लिए||

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 1, 2011

याद जब जब करेंगे हमें “राज़” तब। हाय मेरा तड़पना मुझे याद है।” अल्फ़ाज़ के साथ-साथ एक एहसास भी मिलता है जज़्बात भरा आपके कलाम में| यूँ ही बने रहिये,

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 1, 2011

याद जब जब करेंगे हमें “राज़” तब। हाय मेरा तड़पना मुझे याद है।”

    razia mirza के द्वारा
    February 1, 2011

    शुक्रिया वाहिद साहब |

abodhbaalak के द्वारा
February 1, 2011

रज़िया जी आपने तो बहुत कुछ सच में याद दिला दिया. बहुत ही सुन्दर रचना… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    PRASHANT KAUSIK के द्वारा
    February 1, 2011

    Meri nazar me ye ati visist rachna hai. Really a lot of appreciation from my side

    razia mirza के द्वारा
    February 1, 2011

    अबोध्जी मेरी रचना आपके मन को छू गयी ये मेरे लिए एक बहोत बड़ा inspiration है| आभार|

    razia mirza के द्वारा
    February 1, 2011

    प्रशांतजी आभार मेरी रचना को सराहने के लिए|


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