मेरी आवाज सुनो

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...... बंदीनी

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razia

ऊंची-ऊंची दिवारों से लगकर …

तोतींग दरवाज़े के भीतर से  गुज़रकर,

खुले मेदान से होते हुए…

कारागार की बंदीवानों का उपचार करते-करते,

यहाँ की “बंदीनीओं”की

समय के साथ ….

संघर्षमय जीवन बीताने की प्रेरणा लेकर….

एक नारी ख़ुद “ बंदीनी बन गई …..

क्यों?

जवाब जानना चाहेंगे आप?

….तो….. जवाब के लिये आपको कल तक  इंतेज़ार करना होगा!!!!



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

drsinwer के द्वारा
February 13, 2011

आपका जबाब भी पढ़ लिया बहुत शानदार बधाई सवीकार करैं

    razia के द्वारा
    February 16, 2011

    शुक्रिया डॉ.साहब |

rajkamal के द्वारा
February 12, 2011

aadrniy raziya जी …. सादर अभिवादन ! हम इंतज़ार करेंगे आपकी उस रचना का कल तक …. खुदा करे की कल तो आये ही आपकी उस रचना को भी अपने संग लाये …. आभार

    razia के द्वारा
    February 16, 2011

    आदरणीय राजकमल्जी! हमारी अधूरी कहानी Title से लिखी हुई रचना कृपया पढ़ें


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