मेरी आवाज सुनो

मेरी आवाज़ ही पहचान है॥

88 Posts

766 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1412 postid : 434

"हमारी अधुरी कहानी"Valentine Contest

  • SocialTwist Tell-a-Friend

प्रेम पत्र आँसु के साथ


आज एक ऐसी पोस्ट आपको या कहुं जागरण जंकशन को भेंट कर रही हुं कि पता नहिं इसे Valentine Contest में रखुं या ना रख्खुं इस पर बहोत सोचा।

आख़िर यही परिणाम हुआ कि ये Valentine Contest में आ ही गई। क्योंकि ये एक ऐसी कहानी है जिसे एक प्रेमिका जागरण तक ला नहिं सकती थी।

क्योंकि वो अभी कारागार में है। ये उसका  पत्र है जो उसने गुजराती भाषा में अपने पति को लिखा था। मुझसे कहा था”दीदी” कैसा लिखा है देखो!

और  दीदी अंग्रेज़ी में मुझे  Valentine Day  लिख दो ना।

आज में उस पत्र का  अनुवाद हिन्दी में करके आपके सामने रखती हुं।

अरे हाँ !!इसके लिये मैंने उसकी बाकायदा इजाज़त ले ली है।

प्रिय प्राणेश्वर,

आज मुझे आपको पत्र लिखने को दिल हो रहा है। नींद आंख़ों में नहिं है। सब कोई कहते हैं कि परसों का दिन प्रेमीओं के लिये महत्व रखता है।

प्यार करनेवाले इस दिन  एक दूजे से अपने प्यार का इज़हार करते हैं। याद है आपको दो साल पहले आज ही के दिन हम बिछड गये थे?

तब तो मुझे इस दिन का महत्व पता भी नहिं था। आज जब दूर हैं तब तूम बहोत याद आते हो। पता नहिं कौन से पापों का फ़ल हम यहाँ भूगत रहे हैं?

मैं  जानती हुं कि तुम निर्दोष हो। पर हमारे भाग्य ही फ़ूट गये जो हम यहाँ आकर फ़ँसे हैं। हम दोनों के बीच कितनी बडी-बडी दिवारे हैं?

पता नहिं कब ये दिवारें हमारे बीच से हट जायेंगी और कब हम मिलेंगे?

घर पर हमारा बेटा  हमारे इंतेज़ार में आँखें बिछाये बैठा होगा। सुना है कि हमारा अब हाईकोर्ट में केस चलेगा। शायद भगवान करे हमें निर्दोष छोड दे।

पूर्णिमा ने तूम पर झूठ इल्ज़ाम लगाये पर ये नहिं सोचा कि अब उससे शादी कौन करेगा? और देखिये तो सही कोई  बहन  ऐसे काम में साथ दे सकती है भला?

मुझे पता है ये उसी कि बदमाशी है जीसके पीछे वो पागल हुए जा रही है। उसे तब पता चलेगा जब आशिष उसे छोड देगा।

तूम चिंता मत करना भगवान सब कुछ देख रहा है। उसके घर देर है अंधेर नहिं।

चलो छोडो आज ऐसी बाते करके पूराने घाव फ़िर नहिं छेडना चाहती थी। पर क्या करुं याद आ गये।

जान!! जब हम यहाँ से आज़ाद हो जायेंगे तब फ़िर एक नया संसार बसायेंगे। जिसमें मैं,आप और सिर्फ़ और सिर्फ हमारा छोटा सा “पुष्प”

सब कोई सो रहे हैं पर मेरी आँख़ों में नींद नहिं है।  सारे पूराने दिन एक एक करके याद आ रहे हैं। हमारा प्यार,हमारी शादी और हमारा “पुष्प”

वो कौन सी मनहुस घडी थी जब मैं पूर्णिमा को अपने घर ले आई? जिसने हमारे हरेभरे संसार को आग में झुलस दिया।

अब तो भगवान ही हमारा सहारा है। वही हमारी नाव को पार लगायेगा। मैं हररोज़ हनुमान चालिसा पढती हुं। सोमवार और गुरुवार भी करती हुं।

जान! जब हम  यहाँ से अपने घर निर्दोष जायेंगे तब तूम मुझे “वैष्नोदेवी” लेकर जाओगे ना माता के दर्शन को।

हम सब साथ जायेंगे। हमारा ख़ेत और गाँव का घर भी बेच दिया  ऐसा बडे भैया कह रहे थे मुलाकात में क्या ये सच है? जवाब देना।

अगर हाँ तब भी तूम फ़िकर मत करना हम महेनत करके फ़िर बसालेंगे। दो साल की जुदाई तो बहोत होती है।

भगवान करे पूर्णिमा के दिल में कम से कम “पुष्प” के लिये भी रहम आ जाये और केस कमज़ोर हो जाये।

मेरे पत्र से कमज़ोर मत होना। मैं तूम्हारे साथ हूं। मैं डंके की चोट पर कहती हूं कि” मेरा पति निर्दोष” है। तूम्हें दुनिया से क्या मुझसे ही तो मतलब है।

मैं तूम्हारी हूं और तूम मेरे। कोई हमें अलग नहिं कर सकता। दूर हैं तो क्या हुआ? जान  तो हमारी  एक ही हैं।

हिंमत रखना। देखो मेरी आँख़ों में अब आँसु नहिं हैं। मुझे आनेवालेकल की रोशनी दिखाई देती है।

इसलिये  परसों के लिये तूम्हें Valentine Day कि शुभकामनाएं। अगले साल साथ मनायेंगे इसी आशा के साथ।

तूम्हारी तूम्हारी तूम्हारी……..  प्रिय वंदना

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 2.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

9 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajkamal के द्वारा
February 27, 2011

आदरणीय रज़िया जी …..सादर अभिवादन ! आपने इस लेख में आपसी रिश्तों पर स्वार्थ के हावी हो जाने के बारे में बतलाया है …… सच में ही किस पर भरौसा किया जाए और किस की मदद की जाए क्योंकि कई बार आदमी अच्छाई करके भी बदले में बुराई और बदनामी का दाग ही पाता है …… इस खत से तो यही ज़ाहिर हो रहा है की सारे केस की बुनियाद ही उस अहसान फरामोश के ब्यान पर टिकी हुई है …… उस खुदा से यही प्रार्थना है की इस दुखियारी और हालात की मारी नायिका के पति को बेदाग़ साबित करके उन दोनों को उनके मासूम और निरपराध बेटे से फिर से मिलवाये…… धन्यवाद

    razia mirza के द्वारा
    March 1, 2011

    शुक्रिया राजकमल्जी !आपकी उत्साहवर्धक कमेन्ट के लिए| मैं भी यही प्रार्थना भगवान् से करती हूँ की वो अपने परिवार से जल्द मिला जाए|

drsinwer के द्वारा
February 13, 2011

रज़िया जी एक सचे प्रेमी और प्रमिका की शानदार पोस्ट के लिय बधाई और हमारी सुभ कामनायें की इन दोनों का जल्दी से जल्दी मिलन हो जाय I और वोह जल्दी रिहा हो जाय I

    razia के द्वारा
    February 16, 2011

    शुक्रिया डॉ साहब आपकी उत्साहवर्धक कमेन्ट के लिए|

rameshbajpai के द्वारा
February 13, 2011

रजिया जी पत्नी के समर्पित प्रेम को प्रदर्शित करती बेहतरीन पोस्ट | इन जटिल हालत मेभी यह नारी अपने ह्रदय को विश्वाश व आस्था से पुरद किये है | उसे आने वाले कल की रौशनी नजर आ रही है | बहुत बहुत बधाई , शुभ कामनाये|

    rameshbajpai के द्वारा
    February 13, 2011

    कृपया पुरद को “पूर्ण ” पढ़े

    razia mirza के द्वारा
    February 13, 2011

    जी हां रमेशजी ये टूटी हुई तो है पर अपने पति को टूटने नहीं देना चाहती उसे विश्वास है की वो निर्दोष हैं |

HIMANSHU BHATT के द्वारा
February 12, 2011

राजिया जी…. बहुत ही मार्मिक पात्र प्रस्तुत कर दिया आपने…. इश्वर इस महिला के सपनो को पूरा करे… उसका घर फिर से बसा दे… माँ को उसके बच्चे से मिला दे यही प्रार्थना है…. http://www.himanshudsp.jagranjunction.com

    razia mirza के द्वारा
    February 13, 2011

    हमारी भी यही प्रार्थना है की वो दोनों अपने बच्चे से जल्द मिल जाएं वरना उस बेचारे का क्या भविष्य ?


topic of the week



latest from jagran