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ये J J कौन है?

Posted On: 16 Feb, 2011 में

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jj

तूम्हारी ज़िन्दगी में अब सिर्फ़ दो J रह गये हैं?

एक तो   JAIL और दुसरा J.J.blog|

शाम को थका हारा काम से घर आता हूं तो आज हमारी  JAIL में ये हुआ वो हुआ।

और   J.J.blog पर मैंने ये लिखा वो लिखा!!!

दूसरी कोई बात ही नहिं है तूम्हारी ज़बान पर….

ना तो ढंग  से घर का काम करती हो ना बाहर का।

पहले तो जब मै घर आता था तब चाय-पानी का भी पूछ लेती थी और अब!!!!

रोटी भी जला देती हो और सब्ज़ी भी कच्ची बनाती हो।

पहले तो क्या क्या व्यंजन घर में बनते थे!!!वाह!!!!

वेढमी,पूरणपोळी,खमण,ढोकळा और ना जाने क्या क्या!!!

रात को कभी आँख खुल जाती है तो तूम्हें कोम्प्युटर पर J.J.blog पर ही देखता हूं।

तूम्हारी तो जैसे दिन का चैन रातों की नींद ग़ायब है।

अब तो मुझे भी कविता लिखने को दिल करता है।

घर पे मैं जब भी आता हूं सूनता हुं   J.J.blog

खाने में भी आ जाता है खाता हुं J.J.blog

बीवी का चहेरा देखुं तो पढता हुं J.J.blog

नज़रो के सामने सदा पाता हुं J.J.blog

भाग्यवान आज तो हद तब हो गई जब आज तुमने मुझे Valentine day तक वीश नहिं  किया।

ब्लोग पर तो हमारे प्यार की बडी बडी बातें लिखती हो पर है क्या?

तूम्हें आज मेरे एक सवाल का जवाब देना ही है कि…

“तूम्हारा Valentine कौन है मैं या J.J.blog?


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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

drsinwer के द्वारा
February 17, 2011

रज़िया जी नमस्कार , अपने बहुत अच्छा लिखा बधाई

    razia mirza के द्वारा
    February 17, 2011

    नमस्कार डॉ साहब |आपकी अमूल्य कमेन्ट के लिए आभार|

Ramesh bajpai के द्वारा
February 16, 2011

रजिया जी इस मंच में बरसते आपसी प्रेम व भाई चारे ने भी सभी को इसका कायल कर दिया है \यही दुआ है की यह आपसी सदभाव व प्रेम यु ही सब को सराबोर करता रहे |

    razia mirza के द्वारा
    February 17, 2011

    जी हाँ | बाजपेयीजी आपकी बात बिलकूल सही है इस मंच पर आकर ही तो हम एक दूजे को पहचानने लगे हैं.आपसी भाईचारा इसी मंच की तो दें है हमारे लिए|

R K KHURANA के द्वारा
February 16, 2011

प्रिय रज़िया जी, वाकई इस जेजे ने तो सबको दीवाना बना दिया है ! मुझे भी बहुत डांट पड़ती है ! सब कहते है की काम पर भी सारा दिन कम्प्यूटर और घर में भी कम्प्यूटर ! कभी आँखों को भी आराम दे दिया करो ! लेकिन क्या करे ! आर के खुराना

    razia mirza के द्वारा
    February 17, 2011

    जी शुक्रिया भाईसाहब आपकी कमेन्ट के लिए | आपका भी यही हल है? भाभीजी तो नहिन बोलती आपको? शामको घर लौटते समय कुछ भाभीजी की पसंद ले जाया करो| हा हा हा …

rajkamal के द्वारा
February 16, 2011

आदरणीय रजिया जी ….सादर अभिवादन ! आपने मुझको अपनी नवीनतम पोस्ट देखने की सलाह दी थी ….. लेकिन कल जब मैं यहाँ पर आया था तो सबसे उपर एक पोस्ट नजर आ रही थी लेकिन वोह पिछले साल में प्रकाशित हुई थी जिसमे की आपने कैंसरग्रस्त मरीज के ठीक हो जाने पर उसकी मदद करनी चाही थी ….. लेकिन उसने मदद लेने की बजाय अपनी तरफ से कुछ करने की ठानी थी …… उस लेख के शीर्षक में गरीब की महानता का जिक्र था ….. (लेकिन आज सबसे उपर कोई दूसरी ही पोस्ट नजर आ रही है , यह बात मेरी भी समझ से बाहर है ) मेरी प्रतिकिर्या आपकी उस गरीब की महानता वाली पोस्ट + आपके द्वारा मेरे ब्लाग पर अपनी टिप्पणी में घर में कोहराम के जिक्र को आधार बना कर लिखी गई थी ….. अगर कुछ गलत कहा गया हो तो माफ़ी मांगता हूँ

    razia mirza के द्वारा
    February 17, 2011

    अरे आप क्यों मुआफी मांगते है आपका तो कोई कुसूर थोड़े ही है| मैं भी परेशान हूँ की मैं जो पोस्ट लास्ट में पब्लिश करती हूँ वो न आकर पुरानी पोस्ट ऊपर आती है सेटिंग भी बारबार की है पर…. दूसरा कोहराम वाली पोस्ट तो मेरी लास्ट वाली पोस्ट है बूरा मत मानियेगा | यही कमेन्ट आपके ब्लॉग पर भी दे रही हूँ. मेरी और से आपको परेशान होने पर मुआफी मांगती हूँ. प्लीज़ |

chaatak के द्वारा
February 16, 2011

रज़िया जी, सबकुछ तो ठीक है लेकिन आपको वेलेंटाइन डे तो विश करना ही चाहिए था| जे.जे. महत्वपूर्ण है ठीक है लेकिन आपका वेलेंटाइन, उसके आगे तो खुद जे.जे. नतमस्तक है देखिये प्रतियोगिता तक आयोजित कर रखी है| काफी दिन बाद आपके दर्शन हुए| आशा है आप हमें भुलायेंगी नहीं|

    razia mirza के द्वारा
    February 17, 2011

    अरे हमने तो पहले ही उन्हें वीश किया था पर वो ही इतनी जल्दी में थे की हमारा वीश करने का अंदाज़ ही समज नहीं पाए| आपकी कमेन्ट का आभार | अब तो नेट कनेक्शन है आपको आगे मेरी और से शिकायत नहीं रहेगी|

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 16, 2011

रज़िया जी, अब ये फ़ैसला तो वाकई आप ही के हाथ में है. हम आपके साथ हैं.. शुक्रिया,

    razia के द्वारा
    February 16, 2011

    आभार वाहिदजी आपकी कमेन्ट और साथ का भी|

rajkamal के द्वारा
February 16, 2011

आदरणीय रज़िया जी …सादर अभिवादन ! आपकी पिछली पोस्ट वाला कमेन्ट भी यहीं पर कर रहां हूँ ,क्षमा कीजियेगा …. अगर मेरी शादी हुई तो मैं अपनी होने वाली पत्नी को अपनी तनख्वाह छह हजार की बजाय ५४०० बताना पसन्द करूँगा ….. हम किसी को किराए पर अगर अपना कोई भूभाग देते है तो उससे किराया हर महीने वसूलते है …. अब जब हम उस कुदरत की धरती + वायु + पानी + खाध्य पदार्थ इस्तेमाल करते है तो क्या यह हमारा फर्ज नही बनता है की हम अपनी कमाई का दसवां नहीं तो कुछ ना कुछ दान अवश्य करे …… अगर आपने किसी जरूरतमंद की कोई मदद करनी चाही तो यह आपकी आत्मिक खुशी और संतुष्टि के लिए आपको जरूरी लगा होगा , तभी आपने किसी के लिए कुछ करने की सोची ….. बाकी आपके घर के लोगों के विचारों के बारे में जानकर ही कुछ कहा जा सकता है ….. और रही बात स्वाभिमान और ज़ज्बे की तो यह किसी में भी हो सकता है….. धन्यवाद उनकी महानता के हमको दर्शन करवाने के लिए …..

    razia के द्वारा
    February 16, 2011

    आदरणीय राजकमलजी| आपकी कमेन्ट पढकर कुछ समझ नहीं पाई !!!हां और कमेन्ट के जवाब आपके ब्लॉग पर दिए हैं पर अभी लिखा कमेन्ट मेरी कौनसी पोस्ट की तरफ इशारा करता है ज़रा खुलकर बताना| ये पहलीबार है की मुझे समझ नहीं आया आपका जवाब!!

rajkamal के द्वारा
February 16, 2011

आदरणीय रज़िया जी …… सादर अभिवादन ! आज मैं खुद को बहुत ही शर्मिन्दा महसूस कर रहा हूँ …. आपने मुझको इतना जरूरत से कई गुना ज्यादा मान दिया , जबकि मेरी तो पैसे लेकर भी कोई बेइज्जती भी नही करता …. ***********************************************************************************************************

    razia के द्वारा
    February 16, 2011

    आपकी हर पोस्ट ही दाद देने लायक होती है इसीलिए आपको है कोई मान देता है | रहा सवाल बेइज्जती का तो ऐसा सोचना भी क्यों ?

jeetrohann के द्वारा
February 16, 2011

जय हो जेजे की !वाह

    razia के द्वारा
    February 16, 2011

    शुक्रिया आपका |jeetrohanji

priyasingh के द्वारा
February 16, 2011

बहुत ही हास्यमयी रचना ………….पढ़ कर होंठो पर हंसी तैर गयी …………. सही कह रही है मेरे साथ भी यही होता है ……….. पतिदेव यही कहते है की मौका मिला नहीं की तुम लेप टॉप खोल कर बैठ जाती हो ….. थकती नहीं लिखते लिखते…………….

    razia के द्वारा
    February 16, 2011

    सच है प्रियाजी सुनना तो हम औरतों को ही पड़ता है अगर हमारे पतिदेव कंप्यूटर पर बैठें और अगर हम कहीं आसपास भी नज़र आयें तो कहते है की चाय ले आओ नाश्ता ले आओ | पता है क्यूं ? क्यूंकि हम कहीं उनके मेल पढ़ न लें !!!! मजा आया ना!!!

allrounder के द्वारा
February 16, 2011

रजिया जी, कौन है ये JJ ब्लॉग ?

    razia के द्वारा
    February 16, 2011

    अरे allrounderji आपभी पूछने लगे ये सवाल |आपतो बहेतर जानते हैं फिरभी? चलो पहली कमेन्ट के लिए शुक्रिया |


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