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...चलो आख़िर लादेन मारा तो गया!!!Jagran Junction Forum

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laaden1

10 मार्च 1957 को रियाध  सउदी अरब में एक धनी परिवार में जन्मे ओसामा बिन लादेन

अल कायदा नामक आतंकी संगठन का  प्रमुख था।

जो  संगठन 9 सितंबर 2001 को अमरीका के न्यूयार्क शहर के  वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के साथ विश्व के कई देशों में आतंक फैलाने का दोषी था।  उस अलक़ाएदा संगठन के मुखिया ओसामा बिन

लादिन को पाकिस्तान के एबटाबाद में रविवार रात CIA ने मार गिराया गया। मध्य पूर्वी मामलों के विश्लेषक हाज़िर तैमूरियन के अनुसार ओसामा बिन लादेन को ट्रेनिंग CIA ने ही दी थी।

वो जहाँ रहता था वो एक ऐसी इमारत थी जीसकी दीवार 12 से 18 फ़ीट की थी, जो इस इलाक़े में बनने वाली इमारतों से कई गुना ज़्यादा थी।. इस इमारत में न कोई टेलिफ़ोन कनेक्शन था और न ही इंन्टरनेट कनेकशन। यहीं छिपकर बैठा था दुनिया को अपने आतंक से हिलाकर रख देने वाला आतंकी। जिसने कंई बेगुनाहों को कत्ल कर दिया। क्या उसका यही मज़हब था????

सऊदी अरब में एक यमन परिवार में पैदा हुए ओसामा बिन लादेन ने अफगानिस्तान पर सोवियत हमले के ख़िलाफ़ लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए 1979 में सऊदी अरब छोड़ दिया. अफगानी जेहाद को जहाँ एक ओर अमरीकी  डॉलरों की ताक़त हासिल थी तो दूसरी ओर सऊदी अरब और पाकिस्तान की सरकारों का समर्थन भी था।.

सबसे आश्चर्च की बात गुफाओं में रहने-छिपनेवाला  लादेन अमेरिका को एक पॉश कॉलोनी में मिला!!!!!

वह भी पाकिस्तानी मिलिट्री अकादमी से सिर्फ 800 मीटर की दूरी पर!!!!

जहाँ परदेशी एक परिन्दा भी अपनी उडान नहिं भर सकता उसी ज़मीन पर एक ख़ोफ़नाक आतंकी दुनिया की नज़र से छिपकर  कैसे रह सकता था भला?

या पाकिस्तान  की नज़रे इनायत तो नहिं थी उस पर!!!!!

चलो ख़ेर आख़िर मारा तो गया जो इस्लाम के नाम पर एक धब्बा था ।

नादान जवानों को मज़हब के नाम पर या जिहाद के नाम पर जान की बाज़ी लगाने भेजकर खुद एशो-आराम की ज़िन्दगी बसर करता था।

या कहो कि इस्लाम से ख़िलवाड कर रहा था।

जो अपने वतन (साउदी अरब) को वफ़ादार नहिं था वो भला अपने मज़हब को वफ़ादार कैसे हो सकता था?

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19 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

June 7, 2011

मुझे तो हमेशा से लगा है की लादेन और कुछ नहीं अमेरिका का प्यादा था, जब तक चाहा उसका प्रयोग किया और जब ज़रूरत हुई उसे मारा हुआ दिखाने की तो मारा हुआ दिखा दिया….

allrounder के द्वारा
May 6, 2011

रजिया जी आखिर बुराई का खत्म कभी न कभी तो होना ही था, सो हो गया , ईश्वर इंसानियत से भटके ऐसे लोगों को सदबुद्धि प्रदान करे !

nishamittal के द्वारा
May 5, 2011

रज़िया जी,पाप का घड़ा भरता है तो फूटता ही है,बस थोड़ी तिकड़में लगाने से समय अधिक लग गया,परन्तु हिंसा,नरसंहार,तस्करी,और बेबसों की आहें तो उसके दिन पूरे कर चुकी थी बहुत पहले.अच्छा लेख

rahulpriyadarshi के द्वारा
May 5, 2011

बहुत अच्छा कहा है आपने,लादेन जैसे लोग ही इस्लाम को बदनाम करते हैं,इस पापी का अंत बहुत जरुरी था.पकिस्तान की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता.

    razia mirza listenme के द्वारा
    May 5, 2011

    आभार राहुलजी आपकी कमेन्ट के लिए|

syeds के द्वारा
May 4, 2011

इंसानियत के इस दुश्मन का खात्मा हो ही गया …बेशक वह इस्लाम और इंसानियत का दुश्मन था…. जिसने ऐसी दरिंदगी दिखाई की इंसानियत शर्मसार हो गयी… वह दुश्मन-ए- इस्लाम,इस्लाम के नाम पार धब्बा था सही लिखा आपने… और पडोसी मुल्क के नापाक इरादों पर भी आपने सही सवाल खड़े किये…निश्चित तौर पर उनकी भी भूमिका रही होगी इसे छिपाने में….

    razia mirza listenme के द्वारा
    May 4, 2011

    syed साहब शुक्रिया आपकी कमेन्ट का और मेरी पोस्ट को सराहने का| ऐसे ही दुश्मन इस्लाम को बदनाम करते हैं| इनका खात्मा होना जरूरी है|

abodhbaalak के द्वारा
May 4, 2011

रज़िया जी काफी समय के बाद आपकी कोई पोस्ट….. सच तो ये है की अमेरिका अपने फायदे के लिए किसी को भी इस्तेमाल करता है और बाद में मतलब निकल जाने के बाद….. जब अफगानिस्तान में रूस था तो उसे ओसामा की ज़रुरत थी, जब इरान इराक युद्ध हुआ तो उसे सद्दाम की ज़रुरत थी………………… आपने सही कहा है की ओसामा जैसे लोगों का कोई धर्म नहीं होता है… उनका धर्म केवल आतंकवाद और मासूमों …………….. पर अगर ओसामा जिन्दा पकड़ा जाता तो विश्व के सामने कुछ और तथ्य …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    razia mirza listenme के द्वारा
    May 4, 2011

    शुक्रिया अबोधजी | आपकी कमेन्ट का| आपका कहना ठीक है की अगर ओसामा पकड़ा जाता तो विश्व के सामने कुछ और तथ्य होते …पर अबोधजी देखिये न कसाब पकड़ा गया है पर उसके पीछे लाखों रूपये खर्च हो रहे हैं जो हमारे देश की गरीब जनता को भी नसीब नहीं हैं| और हो सकता है पकड़ा भी जाता तो फिर कोई प्लेन हाईजेक करके उसे छुड़ा लेता| उसको मार देना ही सही था| जो हजारों मासूमों की जान ले चुका था|

शंभू दयाल वाजपेयी के द्वारा
May 4, 2011

असहमत। माफ करें , बहुत सरसरी तौर पर लिखा है।

    razia mirza listenme के द्वारा
    May 4, 2011

    क्यों असहमत हैं आप ये तो बताईये?

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 4, 2011

आदरणीय रज़िया जी …..सादर अभिवादन ! चलो यह तो अच्छा ही हुआ की लादेन के मरने की खुशी के अवसर पर बहाने से आप आई तो …. मैं तो कहता हूँ की अल जवाहिरी समेत समस्त आंतकी मारे जाए ताकि आप बार -२ हमको वोह खुशखबरिया सुनाने आती रहे …. स्वागतम व् ढेरो बधाईयाँ

    razia mirza listenme के द्वारा
    May 4, 2011

    आदरणीय राजकमलजी, आपकी प्यारी सी कमेन्ट पढ़कर बहोत अच्छा लगा| आप ने कहा है ” मैं तो कहता हूँ की अल जवाहिरी समेत समस्त आंतकी मारे जाए ताकि आप बार -२ हमको वोह खुशखबरिया सुनाने आती रहे … मेरा जवाब है इंशाल्लाह | ऐसे आतंकियों के खात्मे की खबर सुनाने जरूर आती रहूंगी| बस इन्तेजार करते रहना|

baijnathpandey के द्वारा
May 3, 2011

रजिया जी ……….जानकारी से भरा उम्दा पोस्ट हर अत्याचारी का एक दिन अंत होता है | आपने सच कहा- लादेन ने अपने कार्यों से सच्चे मुसलमानों की आत्मा को आहत किया | ऐसे व्यक्तियों का कोई धर्म नहीं होता | धन्यवाद |

    razia mirza listenme के द्वारा
    May 4, 2011

    शुक्रिया पांडेजी | आपने सही कहा है हर अत्याचारी का एक दिन अंत होता है|

malkeet singh jeet के द्वारा
May 3, 2011

ये प्रक्रति का नियम है रज़िया ji , ख़राब फल हर पौधे मेंआ सकते है पर उन्हें एक दिन सड़ कर गिरना ही होता है या फिर बाकी फलो को बचाने हेतु तोड़ कर फेक दिए जाते है ओसामा भी इस्लाम के अच्छे पौधे का खराब फल ही था ,जानकारियों से भरी पोस्ट के लिए धन्यवाद http://jeetrohann.jagranjunction.com/2011/05/03/%E0%A4%97%E0%A5%8C-%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AA-2/

    razia mirza listenme के द्वारा
    May 4, 2011

    आदरणीय जीत जी | शुक्रिया | आपका कहना सही है की खराब फल हर पौधे में आ सकता है| पर ओसामा का तो कोई धर्म ही नहीं था|


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