मेरी आवाज सुनो

मेरी आवाज़ ही पहचान है॥

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....कभी तो आया करो!!!!

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meraa gaanv

कुछ हरेभरे खेतों के बीच से ग़ुज़रते हुए रास्तों से…

भीनी सुगंध और कोमल पवन के स्पर्श से आगे निकलकर …

एक घटादार बरगद के पेड की टहेनीयों पर झूलते हुए बच्चों से टकराकर…

उन्हें छेडकर आगे आते ही…

जब पनिहारीयों की छमछम कानमें गूंजनेलगे ।

…और एक बडे से आंगन  में छोटी सी ख़टिया पर हूक्के के धूंएं में एक बाबा दिखाई देने लगें!! बस वहीं रुक जाना ।

यही मेरा घर है यही मेरा पता……

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

priyasingh के द्वारा
May 16, 2011

आपके इस घर के पते पर चलते चलते तो मुझे अपना घर मिल गया…………..मुझे मेरे घर का पता याद दिलाने के लिए आभार……………

syeds के द्वारा
May 16, 2011

रज़िया जी, अच्छी रचना के लिये बधाई http://syeds.jagranjunction.com

nishamittal के द्वारा
May 16, 2011

रज़िया जी अच्छी गहन रचना.बधाई.

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 16, 2011

आदरणीय रज़िया जी …. सादर अभिवादन ! आप की इस रचना को पढ़ने के बाद मुझको माचिस फिल्म का गाना याद आ गया जिसमे की नायक हवा से अपने घर की खैर खबर लेने को कहता है …. आपने जिस स्तर की यह रचना लिखी है एक मेरे जैसा आम पाठक ज्यादातर इसकी गहराई तक नही पहुँच पाता ….. इस भावो की गहराईयों में डूबती और डुबाती हुई रचना के लिए आपका आभार

    kraant के द्वारा
    May 19, 2011

    Razia ji,bahut achhe se aapne rachna ko kalambadhh kiya Manohar,bahut khoob


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