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मेरे बाबा!!फाधर्स डे पर मेरे आँसुंओं का तोहफ़ा!!!

Posted On: 20 Jun, 2011 में

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धक..धक..धक..धकमौत का काउनडाउन शुरु हो चुका था।

मेरे बाबा(पिताजी) हम सब को छोडकर दुनिया को अलविदा कहने चले थे।

अभी सुबह ही तो मैं आईथी आपको छोडकरबाबा

मैं वापस आने ही वाली थी। और जीजाजी का फोन सुनकर आपके पास भी गई। आपके सीनेपर मशीनें लगी हुईं थीं।

आप को ओकसीजन की ज़रुरत थी शायद ईसीलिये। फ़िर भी आप इतने होश में थे कि हम तीनों बहनों और भाइ को पहचान रहे थे। आई.सी.यु में किसी को जाने कि ईजाज़त नहिं थी

….पर बाबाहमारा दिल रो रहा था कि अभी एक ही साल पहले तो मेरीअम्मी हमें छोडकर जहाँ से चली गई थीं आप हम सब होने के बावज़ुद तन्हा ही थे।

हम सब मिलकर आपको सारी खुशियों में शरीक करते …..

परबाबाआप !!हर तरफ मेरी अम्मीको ही ढूंढते रहते थे। आपको ये जहाँ से कोई लेना देना ही नहिं था मेरी अम्मीके जाने के बाद।

क्याबाबा ये रिश्ता इतना ग़हरा हो जाता है?

मुझे याद है आप दोनों ने हम तीनों बहनों को समाज और दुनिया कि परवा किये बिना ईतना पढाया लिखाया लोग हम बेटीयों को पढाने पर ताने देते रहते थे आप दोनों को।

पर आप और अम्मी डटे रहे अपने मज़बूत ईरादों पर। यहाँ तक की आप ने हमारी जहाँ जहाँ नौकरी लगी साथ दिया। आपको तो था कि हमारी बेटीयाँ अपना मकाम बनायें।

औरबाबा आप दोनों कि महेनत रंग लाई। हम तीनों बहनों और भाई सरकारी नौकरी मे अव्वल दर्जे के मकाम पर गये। शादीयाँ भी अच्छे ख़ानदान में हो गईं।आप ने हमारे लिये ना धूप की परवा की ना बारिश की।

अपने आपको पीसते रहे जीवन की चक्की में।

आप दोनों ने हमारे लिये बहोत सी तकलीफ़ उठाई शायद हम भी इतनी अपने संतानों के लिये नहिं उठा सकते।

समाज को आपका ये ज़ोरदार जवाब था। आप दोनों महेंदी कि तरहाँ अपने आपको घीसते रहे और हम पर अपना रंग बिखरते रहे अरे आप दोनों दिये कि तरहाँ जलते रहे |

औरहमारी ज़िन्दगीयों में उजाला भरते रहे। आप की ज़बान पर एक नाम बार बार आता रहामुन्ना ! हम तीनों बहनों का सब से छोटा भाई!बाबा हमारे छोटे भाईमुन्नाने भी आप को बचाने के लिये बहोत कोशिश की है।

बाबा हमें थोडी सी ठोकर लगती आप हमें संभाल लेते। आप पर लगी ये मशीनरी मेरी साँसों को जकड रही थी। और आप हमारा हाथ मज़बूती से पकडे हुए थे कि

हम एकदूसरे से बिछ्ड जायें। मौत आपको अपनी आग़ोश में लेना चाहती थी। हम आपको ख़ोना नहिं चाहते थे।बाबा आपकी उंगलीयों को पकड्कर अपना बचपन याद कर रही थी मैं। वही उंगलीयों को थामे हम आज इस राह पर ख़डे हैं। आप दोनों ने हमारे लिये बडी तकलीफ़ें झेली हैं। आप हमें अपनी छोटी सी तंन्ख़्वाह में भी महंगी से महंगी किताबें लाया करते थे।

आपकी भीगी आँखों में आज आंसु झलक रहे थे। बारबार हम आपकी आँखों को पोंछ्ते रहे। नर्स हमें बार बार कहती रही कि बाहर रहो डोकटर साहब आनेवाले हैं।

मुझे गुस्सा रहा था कि आपको डीस्चार्ज लेकर घर ले जाउं कम से कम आपको तन्हाई तो नहिं महसूस होगी। हम दो राहे पर थे या तो आपकी जान बचायें या फ़िर आपके पास रहें।

धक..धक..धक.. में आप खामोश हो गये थोडी देर आँखें खोलकर बंद कर लीं आपने। हमें लगा आप सो रहे हैं

पर…. डोकटर ने आकर कहा ” He is expired”

आप हमें छोडकर आख़िरअम्मी के पास पहोंच ही गये।बाबाआपकी तस्वीर जो पीछ्ले साल ली गई थी मेरे पास है आपअम्मीकी क़ब्र पर तन्हा बैठे हैं|

baabaa

आज आपको भी बिल्कुल अम्मी के पास ही दफन कर आये हैं हम।

आपकी यादें हैं हमारे लिये बाबा यह लिखते हुए मेरी आँख़ों के आगे आँसुओं कि चिलमन जा रही है।

छीप छीपकर पोंछ रही हुं ताकि कोई मुझे रोता हुआ देख ले।

ये कैसी विडंबना हैबाबा”!!!!

बाबा”मैं अब बहोत कम आपके घर जाती हुं ..

क्योकि आप और अम्मी की वो हर जगह याद आती है ….

और मैं जब भी जाती हुं आपदोनों को ढुंढती रहती हुं।

आप का बिस्तर,कुर्सी जिस पर बैठकर आप किताबों के पन्ने पलटाया करते थे।

क्या लिखुं बाबा !!!  बहोत लिखना है पर लिख नहिं पाती। ये आँसु कुछ लिखने नहिं दे रहे।

बार बार पोंछ्ने पडते हैं इन्हें।

बाबा आपने तो हमारी ज़िन्दगी लिख दी है।

हम क्या तोहफ़ा दे सकते हैं आपको भला???सिर्फ़ आँसु!!!!!

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19 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abodhbaalak के द्वारा
June 24, 2011

रज़िया जी अपनों को खोना आसन नहीं है, हमें पता है की हर को एक दिन जाना है पर ……… मै अपने बाबा को डेढ़ साल पहले खो चूका हूँ और इस लिए जब माँ के बारेमे पता चला तो फ़ौरन ……. जहाँ तक मै जानता हूँ किसी के जाने से दुनिया नहीं रुक जाती है पर फिर भी एक खिला सी…. हम केवल उनको याद ही नहीं करते बल्कि उनके लिए बहुत कुछ कर सकते हैं …. उनके नाम पर …. अब रही बात आपके इस लेख की, तो मै थोडा भावुक इंसान हूँ, जल्दी ही आँख से आंसू निकल पड़ते हैं, कुछ और कहूँ? http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    razia mirza listenme के द्वारा
    June 26, 2011

    शुक्रिया अबोधजी| आपकी कमेन्ट भी बड़ी ही भावुक होती है आपकी तरहां|

shiromanisampoorna के द्वारा
June 22, 2011

माता-पिता ही भगवान है उनका लाड प्यार दुलार और अपने बच्चों को अपने से भी अधिक कामयाब बनाने में सबसे ज्यादा ख़ुशी उन्हें ही मिलती है आपकी भावनाओ को नमन करती हूँ माता-पिता अतुलनीय है/

    razia mirza listenme के द्वारा
    June 26, 2011

    आभार शिरोमणी जी आपकी कमेन्ट के लिए|

Abdul Rashid के द्वारा
June 21, 2011

जिंदगी कि आखरी मंजिल मौत है जिसे कोई झुठला नही सकता. मरने वाले के लिए दुआ किजिए ताकि उनकि राह आसान हों और उन्हें जन्नत नसिब हो. लेख यकिनन दिल को छु गया लेकिन मै जानना चाहूँगा शीर्षक ठीक है क्या. अल्लाह आपको सब्र अता करे और आपके वालीद मोहतरम को जन्नत अता करे.

    razia mirza listenme के द्वारा
    June 21, 2011

    रशीदा साहब! आपकी बहेतरीन कमेन्ट के लिए शुक्रिया|आपने मरहूम के लिए मगफिरत की दुआ की शुक्रिया|

vinitashukla के द्वारा
June 21, 2011

बहुत ही मार्मिक और हृदयस्पर्शी प्रस्तुति.

    razia mirza listenme के द्वारा
    June 21, 2011

    आभार विनीताजी |

newrajkamal के द्वारा
June 21, 2011

आदरणीय रजिया जी ….सादर अभिवादन ! मेरे नए जन्म के पहला कमेन्ट आपके पावन ब्लॉग पर लिखने का सोभाग्य मिला धन्यवाद

    razia mirza listenme के द्वारा
    June 21, 2011

    आभार आपकी कमेन्ट का और बधाई नए जनम के लिए वो भी नेपाल में|

shaktisingh के द्वारा
June 20, 2011

आपने बेहद रोचक और दिल को छु लेने वाला लेख लिखा है.

    razia mirza listenme के द्वारा
    June 20, 2011

    शक्तिसिंहजी शुक्रिया आपका जो आपने मेरे लेख को सराहा|

opveerendrasingh के द्वारा
June 20, 2011

पिता के रिश्ते को शब्दों में पिरोकर बहुत अच्छ प्रस्तुत किया है आपने…….हमने तो पिता को देखा ही नहीं, हमें दुनियाँ में आने के दो माह पहले ही वो दुनियाँ से रुख़सत कर चुके थे और दुनियाँ में काफी लोग ऐसे मिलेंगे जिनके सर से माँ बाप का साया उठ गया है..यह नियति है कि, आया है वो जायेगा…फिर भी यादें रह जाती है….सुखद यादें हमें खुशियाँ प्रदान करती हैं तो साथ ही दुखद यादें हमें किसी भी परिस्थिति में आगे बढने को प्रेरणा देती हैं. आपने बहुत अच्छा लिखा…..मार्मिक वर्णन

    razia mirza listenme के द्वारा
    June 20, 2011

    सही कहा है आपने विरेंद्रसिन्ह्जी की ‘यादें रह जाती है….सुखद यादें हमें खुशियाँ प्रदान करती हैं तो साथ ही दुखद यादें हमें किसी भी परिस्थिति में आगे बढने को प्रेरणा देती हैं.’ आपकी कमेन्ट के लिए आभार| आपके पिताजी के बारे में सुनकर ऐसा लगा की हमारा darda तो आपके आगे कुछ भी नहीं | मेरी संवेदनाएं आपके साथ हैं|

    op veerendra singh के द्वारा
    June 21, 2011

    शुक्रिया…रज़ियाजी……संवेदनाऎ साझा करने के लिए….. वैसे दर्द केवल दर्द होता है…..शायद हम ही उसे कम या ज्यादा के पैमाने पर आँकते रहते हैं. किसी का दर्द किसी को छोटा, तो किसी को बड़ा नज़र आने लगता है. खैर ये दुनियाँ का दस्तूर है………लोग एक दूसरे की भावनाओं को समझकर, दर्दों को साझा करलें तो दर्द कैसा भी हो , अहसास कम हो जायेगा. पुनः शुक्रिया….आभार

Tamanna के द्वारा
June 20, 2011

आपकी यह रचना बेहद गंभीर और मार्मिक है…

    razia mirza listenme के द्वारा
    June 20, 2011

    शुक्रिया तमन्नाजी आपकी कमेन्ट के लिए|

Manoj के द्वारा
June 20, 2011

बेहद गंभीर और  भावनाओं से भरा हुआ लेख… अगर इस लेख को सच्चे मन से पढ़ा जाए तो आंसुओं की स्वत: ही धारा बहने लगेगी…

    razia mirza listenme के द्वारा
    June 20, 2011

    आभार मनोजजी आपकी प्रतिक्रया के लिए|


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